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April 25, 2026 12:14 am

पाकुड़ विधानसभा: कांग्रेस की जीत पर मंथन और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

राजकुमार भगत

पाकुड़: विधानसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के उम्मीदवार निसात आलम की भारी जीत के बाद राजनीतिक गलियारों और बाजारों में चर्चाओं का दौर जारी है। विपक्ष के लिए इस नतीजे को पचाना मुश्किल साबित हो रहा है। एक ओर जहां चुनाव परिणामों पर मंथन हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कई लोग कह रहे हैं कि अगर सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट होतीं, तो नतीजा कुछ और हो सकता था। लेकिन आंकड़े इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हैं।

कांग्रेस की जीत और गणित का विश्लेषण:

इस चुनाव में कुल 16 उम्मीदवार मैदान में थे, और मतदान प्रतिशत 75-76% रहा, जो अपने आप में काफी ऊंचा है। कांग्रेस और झामुमो गठबंधन ने 154,022 मत प्राप्त किए, जबकि अन्य सभी विपक्षी उम्मीदवारों के कुल मत 140,455 ही रहे। यानी, सभी विपक्षी पार्टियों के वोट जोड़ने के बाद भी कांग्रेस को हराना संभव नहीं था।

चुनाव परिणाम के आंकड़े:

  • कांग्रेस-झामुमो गठबंधन: 154,022 मत
  • सभी विपक्षी दलों के कुल मत: 140,455
  • मतों का अंतर: 13,563

प्रमुख उम्मीदवारों के प्रदर्शन:

  1. अजहर इस्लाम (आजसू): 68,919 मत
  2. अकील अख्तर (सपा): 46,417 मत
  3. अनंत तुरी (निर्दलीय): 605 मत
  4. मो. अशरफ अली (आवि पार्टी): 438 मत
  5. मोहम्मद हनीफ (निर्दलीय): 3,162 मत
  6. अशराफुल शेख (निर्दलीय): 2,738 मत
  7. शंभू नंदन कुमार (शिवसेना): 709 मत
  8. दिबेंदु मंडल (लोअपा): 334 मत
  9. प्रदीप रजक (निर्दलीय): 1,436 मत
  10. हंजेला शेख (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी): 1,554 मत
  11. मुकेश शुक्ला (निर्दलीय): 6,166 मत
  12. हाजी तनवीर आलम (एआईएमआईएम): 1,332 मत
  13. संजय कालिंदी (सोशलिस्ट यूनिटी पार्टी): 318 मत
  14. उमर अंसारी (नवप्रगति मोर्चा): 533 मत
  15. शेख सैफुद्दीन (कम्युनिस्ट पार्टी): 3,612 मत
  16. नोटा: 2,087 मत

मतदान का कुल आंकड़ा:

इस बार कुल 2,94,477 मतदाताओं ने मतदान किया। इसमें कांग्रेस-झामुमो गठबंधन को 154,022 वोट मिले, जो किसी भी परिस्थिति में अन्य दलों की संयुक्त ताकत से अधिक रहे। चुनाव परिणाम स्पष्ट संकेत देते हैं कि कांग्रेस-झामुमो गठबंधन ने अपनी रणनीति, संगठन और जनाधार से एक मजबूत प्रदर्शन किया है। विपक्षी दलों के लिए यह एक बड़ा सबक है कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और दोषारोपण की बजाय उन्हें अपनी कमजोरियों पर मंथन करना चाहिए। कांग्रेस उम्मीदवार निसात आलम की यह जीत केवल एक राजनीतिक जीत नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि जनता का विश्वास गठबंधन की नीतियों और नेतृत्व पर है। आंकड़े बताते हैं कि विपक्षी दलों का आपस में एकजुट होना भी कांग्रेस की इस जीत को रोकने में असफल होता। इस चुनाव में जनता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि परिणाम केवल गठजोड़ से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और सही नेतृत्व से तय होते हैं। कांग्रेस और झामुमो गठबंधन की इस जीत को हल्के में लेना विपक्ष के लिए एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। आने वाले समय में अगर विपक्ष एक नई रणनीति नहीं बनाता, तो इस गठबंधन को हराना उनके लिए और भी कठिन हो जाएगा।

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