सतनाम सिंह
पाकुड़: पचुवारा कोल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, पाकुड़, झारखंड ने DBL (दिलिप बिल्डकॉन) की नीतियों और ट्रांसपोर्टर्स के हितों की अनदेखी को लेकर कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर DBL की ओर से बिना सहमति के ATL फाइनेंस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लेनदेन थोपने और बकाया भुगतानों में अनियमितता पर नाराजगी जाहिर की है।
क्या है मामला?
एसोसिएशन के अनुसार, DBL ने नलहटी से गुमानी तक कार्यरत ट्रांसपोर्टर्स के साथ हुए समझौतों का उल्लंघन किया है। ट्रांसपोर्टर्स को ATL फाइनेंस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करने और इसके माध्यम से वित्तीय लेनदेन करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। यह कदम बिना उनकी सहमति के उठाया गया है, जिससे ट्रांसपोर्टर्स को वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, जुलाई और अगस्त 2024 के बकाया भुगतान को लेकर भी ट्रांसपोर्टर्स नाराज हैं। उनके मुताबिक, DBL की ओर से समझौतों का पालन न करना कर्मचारियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
एसोसिएशन की मांगें
पचुवारा कोल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने DBL और प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- ATL फाइनेंस प्लेटफॉर्म के प्रयोग को सहमति के बिना लागू करना तुरंत बंद किया जाए।
- सभी बकाया भुगतानों का शीघ्र निपटारा किया जाए।
- ट्रांसपोर्टर्स के साथ हुए मूल अनुबंध का पूरी तरह पालन हो।
- कर्मचारियों और ट्रांसपोर्टर्स के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
अधिकारियों को दी गई जानकारी
एसोसिएशन ने उपायुक्त, उप विकास आयुक्त, एसडीओ, और DBL के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई विभागों को पत्र की प्रतिलिपि भेजी है। एसोसिएशन ने इस मामले पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है, ताकि ट्रांसपोर्टर्स को उनकी समस्याओं से राहत मिल सके।
ट्रांसपोर्टर्स में नाराजगी, आंदोलन की संभावना
ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। पचुवारा कोल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि ट्रांसपोर्टर्स के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
आगे की योजना
एसोसिएशन ने आश्वासन दिया है कि चतरा और मुरारई में प्रत्येक शिफ्ट में दो पोर्टर की तैनाती और नलहटी, चतरा, व राजग्राम में पोर्टर की ड्यूटी को 8 घंटे तक सीमित करने जैसे लंबित कार्यों को भी जल्द ही पूरा किया जाएगा। यह मामला अब ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ट्रांसपोर्टर्स और उनके संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों के हितों पर कोई समझौता नहीं होगा। प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





