अजहर इस्लाम ने साबित किया — सेवा ही असली राजनीति है।
बजरंग पंडित
पाकुड़: एक गुमनाम मां, टूटी उम्मीदें, और घायल बेटा—ये कहानी किसी फ़िल्म की नहीं, हक़ीक़त की है। बीते हफ्ते एक महिला, जिसकी पहचान तक किसी को नहीं थी, आंखों में आंसू और दिल में एक माँ का दर्द लिए समाजसेवी अजहर इस्लाम के पास पहुंची।उसका बेटा एक दर्दनाक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी टांग टूट चुकी थी, लेकिन इलाज के लिए न पास में पैसे थे, न कोई जान-पहचान, न कागज़ात।अजहर इस्लाम ने उस महिला से कोई सवाल नहीं किया—न नाम पूछा, न पहचान। उन्होंने सिर्फ़ उसकी आंखों में झांककर देखा और इंसानियत की ज़िम्मेदारी निभाई।बिना किसी औपचारिकता के, तुरंत उसके बेटे के इलाज का इंतज़ाम करवाया गया।अजहर इस्लाम ने कहा,
“मेरे लिए राजनीति सिर्फ़ कुर्सी तक सीमित नहीं है। यह पीड़ितों का सहारा बनने, बेसहारा को हिम्मत देने और ज़रूरतमंद को न्याय दिलाने का रास्ता है।”यह घटना आज के दौर में इंसानियत की एक मिसाल बन गई है। जब सिस्टम कागज़ों में उलझा होता है, तब एक संवेदनशील दिल आगे बढ़ता है।
“मेरे बेटे को बचा लीजिए…”
वो शब्द नहीं थे, वो एक मां की चीख़ थी जो लहूलुहान बेटे को देख रही थी और उसकी सांसें बचाने की आखिरी लड़ाई लड़ रही थी।
मैं आपको नहीं जानती, लेकिन अब आप मेरे लिए भगवान जैसे हैं…”
इलाज के बाद जब मां ने कहा ये शब्द, पूरा कमरा खामोश हो गया।
मां की आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन इस बार वह आंसू डर के नहीं, राहत के थे।






