पाकुड़। जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर तलवाडांगा स्थित महाकाल शक्तिपीठ में मां दुर्गा की 1008 भुजाओं वाली भव्य प्रतिमा स्थापित है। 17 फीट ऊंची यह प्रतिमा कमल के आसन पर विराजमान है। इसकी विशेषता यह है कि पिछले 22 सालों से यहां मां की पूजा प्रतिदिन वैदिक रीति-रिवाज और ज्योतिष विद्या के आधार पर होती आ रही है। महाकाल शक्तिपीठ की स्थापना 1977 में स्वामी सिद्धार्थ परमहंस महाराज ने स्थानीय लोगों की मदद से की थी। शुरुआत में यहां 10 भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित की गई थी। बाद में संशोधन कर 18, 54 और 108 भुजाओं वाली प्रतिमा बनाई गई। वर्ष 2008 में उड़ीसा के मूर्तिकारों द्वारा तैयार की गई 1008 भुजाओं वाली स्थायी प्रतिमा की स्थापना महाराज सिद्धार्थ परमहंस के नेतृत्व में हुई। माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विनी मास में विशेष पूजा-अर्चना होती है। अश्विनी मास में नवरात्र के दौरान पूरे 9 दिनों तक वैदिक रीति से अनुष्ठान किए जाते हैं। यहां कुमारी पूजन का भी खास महत्व है।
महाकाल शक्तिपीठ में सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि बंगाल और बिहार से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई मां की आराधना अवश्य फल देती है।





