विभाग–संवेदक–बिचौलियों की तिकड़ी, अब ‘कलम मैनेज’ का ट्रेंड भी शुरू।
पाकुड़: पाकुड़ जिले में विकास योजनाओं के टेंडर को लेकर चल रहा मैनेजमेंट का खेल दिनों-दिन तेज होता जा रहा है। जिला परिषद, नगर परिषद, आईटीडीए, ग्रामीण विकास विभाग और विशेष प्रमंडल सहित कई विभागों में टेंडर प्रक्रिया के दौरान संवेदकों और कुछ चश्माधारी तथा मोटे-पतले बिचौलियों की सक्रियता लगातार चर्चा में है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि टेंडर प्रक्रिया के आसपास इन खास लोगों का जमावड़ा रहता है, जो विभाग और संवेदक के बीच कड़ी बनकर काम करते हैं।
अब नया ट्रेंड—“कलम मैनेज”, जमीनी हकीकत को दबाने का आरोप
पाकुड़ में अब एक और नई प्रक्रिया चर्चा में है—कलम मैनेज। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस कलम का काम जमीनी हकीकत को जिला प्रशासन और सरकार तक पहुंचाना था, वही अब मैनेज की जा रही है। कहा जा रहा है कि कुछ कर्मचारियों और संवेदकों के बीच पहले से ही मेल-मिलाप चलता था, लेकिन अब काम शुरू होने से पहले ही रिपोर्टिंग से जुड़े लोगों को साधने की कोशिश की जा रही है ताकि खराब काम या गड़बड़ी की जानकारी ऊपर तक न पहुंचे।
आईटीडीए की कब्रिस्तान घेराबंदी योजना पर भी सवाल
सूत्रों के अनुसार आईटीडीए द्वारा करीब 22 लाख रुपये की कब्रिस्तान घेराबंदी योजना भी इस कथित प्रक्रिया से अछूती नहीं रही। आरोप है कि राशि की तरह ही “कलम” को भी “घेरा” गया, ताकि रिपोर्टिंग में किसी तरह की आपत्ति या गड़बड़ी न दिखे।
प्रखंड स्तर पर भ्रष्टाचार की स्थिति पहले से ही गंभीर
ग्रामीण बताते हैं कि प्रखंड स्तर पर भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। मनरेगा योजनाओं में लूट-खसोट की शिकायतें पहले से चरम पर थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले कार्य क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों को मैनेज किया जाता था, पर अब विभागीय कर्मचारी और संवेदक मिलकर शुरुआत में ही “सबकुछ सेट” करने की कोशिश करते हैं।
लोगों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग
गांवों में खराब गुणवत्ता वाले कार्यों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब रिपोर्टिंग ही मैनेज हो गई, तो जिला प्रशासन तक वास्तविक स्थिति कैसे पहुंचेगी?लोगों ने मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया, कार्य आवंटन, बिचौलियों की भूमिका और संबंधित विभागों की गतिविधियों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।





