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February 26, 2026 8:52 am

नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा का आयोजन, शिवलिंग उत्पत्ति और महिमा पर हुआ चर्चा।

पाकुड़: जिले में चल रहे 9 दिवसीय शिव महापुराण के धार्मिक अनुष्ठान का दूसरा दिन बिजली कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुआ। कथा अमृत वर्षा की तरह श्रद्धालुओं के लिए ज्ञान और भक्ति का अवसर लेकर आई। कथा वाचक आचार्य धीरज शास्त्री ने शिवलिंग की उत्पत्ति और शिव पुराण की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शिवलिंग भगवान शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है। शिव पुराण में उल्लेख है कि ब्रह्मा और विष्णु के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। विवाद को समाप्त करने के लिए एक विराट, आदि-अंत रहित अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ। ब्रह्मा ने उसे ऊपर से खोजने का प्रयास किया, जबकि विष्णु ने नीचे से खोजा, लेकिन दोनों असफल रहे। अंततः उस स्तंभ से स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए। यह पहला शिवलिंग माना जाता है, जो शिव के अनंत और निराकार स्वरूप को दर्शाता है। आचार्य ने शिव पुराण की महिमा भी बताई। शिव पुराण अठारह महापुराणों में से एक है और शैव धर्म का प्रमुख ग्रंथ है। यह भगवान शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय से संबंधित लीलाओं, महिमा और पूजा पद्धति का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग का भी ज्ञान है।
श्रद्धालुओं ने कथा में गहन रुचि दिखाई और शिवलिंग की उत्पत्ति व शिव पुराण की महिमा को ध्यानपूर्वक सुना।

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