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January 23, 2026 9:35 pm

वार्ड संख्या–35 से मीरा देवी ने चुनाव लड़ने के उद्देश्य और जनसमस्याओं पर रखी बेबाक राय

पत्रकार अंकित कुमार लाल

मेदिनीनगर: वार्ड संख्या–35 की पूर्व मुखिया एवं वरिष्ठ राजनीतिक नेत्री मीरा देवी ने आगामी चुनाव को लेकर अपने उद्देश्य, अनुभव और नगर निगम क्षेत्र की जमीनी समस्याओं पर खुलकर बात की।
मीरा देवी ने बताया कि वर्ष 2010 के अंतिम माह में हुए मुखिया चुनाव में उन्होंने 600 वोटों से जीत हासिल की और वर्ष 2011 में मुखिया का पद संभाला। राजनीतिक सफर पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वे 1992 में राष्ट्रीय जनता दल की जिला अध्यक्ष बनीं और 2026 में पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व पर पहुंचीं।
उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने जनता की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ कई लोगों को रोजगार से भी जोड़ा, जो आज विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

चुनाव लड़ने का उद्देश्य

मीरा देवी ने स्पष्ट कहा कि अब यह क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो चुका है और ओहदे के बिना जनता के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। इसलिए वे चुनाव लड़ रही हैं, ताकि अधिकार के साथ जनता की सेवा कर सकें।

जाम, सफाई और जल संकट पर सवाल

शहर के सुंदरीकरण पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही विकास के दावे किए जा रहे हों, लेकिन शाहपुर क्षेत्र में लंबे समय तक जाम की समस्या बनी रहती है, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि कागजों में सफाई दिखाई जाती है, लेकिन हकीकत में उनके क्षेत्र की सड़कों पर नियमित सफाई नहीं होती।
जल संकट को लेकर उन्होंने बताया कि पानी कभी-कभार ही आता है, और गर्मी के मौसम में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मेयर कैसा होना चाहिए

उन्होंने कहा कि इस बार जनता को ऐसे व्यक्ति का चयन करना चाहिए जो लोगों से मिलने में समय न लगवाए, उनकी बात सुने और समस्याओं का त्वरित समाधान करे।

महिला सीट और असली सशक्तिकरण

महिला आरक्षण पर सवाल उठाते हुए मीरा देवी ने कहा कि आज भी कई जगहों पर महिलाओं को केवल मुखौटा बनाया जाता है, जबकि काम उनके पति या पुरुष परिजन करते हैं।
उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को वास्तविक कार्य करने का अवसर नहीं मिलेगा, कार्यालयों की जानकारी नहीं होगी, तो वे आत्मविश्वास से इंटरव्यू या सार्वजनिक मंच पर कैसे आएंगी।

अपने अनुभव का उदाहरण

मीरा देवी ने कहा कि जब वे मुखिया थीं, तो जनता सीधे उनके कार्यालय आती थी, और उन्होंने स्वयं समस्याओं का समाधान किया। उनके पति ने कभी उनके कार्य में हस्तक्षेप नहीं किया।
उन्होंने भरोसा जताया कि उम्र भले ही बढ़ी हो, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने का जज्बा आज भी वैसा ही है।
अंत में उन्होंने कहा कि जनता आज ऐसे नेता चाहती है जो उनके बीच रहे, उनके लिए बोले और उनके हक के लिए काम करे—और वे उसी भरोसे के साथ चुनाव मैदान में हैं।

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