प्रभु श्रीराम–माता शबरी महायज्ञ सह प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उमड़ रही आस्था की अविरल धारा – श्री-श्री 108 श्री रविंद्र पाण्डेय जी महाराज
संजय कुमार गुप्ता
पांकी / पलामू
पिपराटांड थाना क्षेत्र के ग्राम लोहरसी (टोला – राजा गोसांईं) में प्रभु श्रीराम सह माता शबरी महायज्ञ एवं प्राण प्रतिष्ठा समारोह का भव्य और दिव्य आयोजन 18 मार्च को कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। पांच दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन सायंकाल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा है।
इस महायज्ञ का संचालन ब्रह्मरिषि श्री-श्री 108 श्री रविन्द्र पाण्डेय जी महाराज के परम सानिध्य में अत्यंत सुव्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। यज्ञ स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना हुआ है।
माता शबरी: अटूट भक्ति और समर्पण की प्रतीक
माता शबरी भगवान श्रीराम की परम भक्त थीं, जिन्होंने अपने निष्कलंक प्रेम और अटूट श्रद्धा से प्रभु को प्रसन्न किया। रामायण के अनुसार, उन्होंने वर्षों तक प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा की और जब भगवान उनके आश्रम पहुंचे, तो उन्होंने अपने प्रेम से सने जूठे बेर उन्हें अर्पित किए। भगवान श्रीराम ने उनके प्रेम और भक्ति को स्वीकार करते हुए उन्हें मोक्ष प्रदान किया। माता शबरी यह संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति में जाति, रूप या स्थिति का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि केवल प्रेम और समर्पण ही सर्वोपरि होता है।
प्रवचन से भाव-विभोर हो रहे श्रद्धालु
प्रत्येक संध्या आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार की संध्या को बक्सर से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक रोहित शास्त्री ने रामजन्मोत्सव की अत्यंत मार्मिक कथा सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं, विशेषकर माताओं एवं बहनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचन से पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया।
मंचासीन यज्ञाधीश महाराज के साथ गुरुभ्राता जिला धर्माचार्य प्रमुख बाल योगी संत विभु सुमन जी ब्रह्मचारी भी उपस्थित रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ गई।
रविन्द्र पाण्डेय जी महाराज का प्रवचन
ब्रह्मरिषि श्री रविन्द्र पाण्डेय जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा—
“यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देने का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागकर सद्गुणों को अपनाने का माध्यम है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, वहीं माता शबरी हमें सिखाती हैं कि सच्चे प्रेम और भक्ति से भगवान को पाया जा सकता है।”
उन्होंने आगे बताया कि यज्ञ के सफल संचालन में कमिटी का सराहनीय सहयोग मिल रहा है। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन लंगर की व्यवस्था की गई है तथा महाप्रसाद का वितरण भी नियमित रूप से किया जा रहा है।
मुखिया पति अरविन्द सिंह का संबोधन
पंचायत के मुखिया पति सह समाजसेवी अरविन्द सिंह ने अपने संबोधन में कहा—
“यह महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक है। ऐसे आयोजन से गांव में भाईचारा बढ़ता है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। हमारा प्रयास है कि यह आयोजन सफल हो और क्षेत्र में सुख-शांति एवं समृद्धि का संदेश फैलाए।”
सेवा और समर्पण का अनूठा उदाहरण
यज्ञ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कमिटी द्वारा प्रतिदिन लंगर एवं महाप्रसाद की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है, जिससे दूर-दूर से आए श्रद्धालु भी बिना किसी असुविधा के धार्मिक अनुष्ठान का लाभ उठा रहे हैं।
22 मार्च को होगा भव्य समापन
रविन्द्र पाण्डेय जी महाराज ने जानकारी दी कि 22 मार्च को हवन-पूर्णाहुति, भव्य भंडारा एवं संत-यज्ञाचार्यों की विदाई के साथ इस महायज्ञ का समापन होगा।
आयोजन में इनका सराहनीय योगदान
इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में पंचायत के मुखिया पति अरविन्द कुमार सिंह, समाजसेवी मुकेश कुमार गुप्ता, नागेंद्र कुमार, अरुण कुमार सहित कई गणमान्य लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और सद्भाव का संदेश भी प्रसारित कर रहा है। श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज भी लोगों के हृदय में धर्म और संस्कृति के प्रति गहरी आस्था विद्यमान है।







