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April 5, 2026 11:57 pm

गैस किल्लत और बढ़े दाम से महंगाई की मार, रसोई से बाजार तक हाहाकार।

थाना परिसर में गैस वितरण, होटल-मिठाई दुकानों ने बढ़ाए दाम, बिजली बदहाल तो कोयला भी महंगा, आम आदमी पिसा।

पाकुड़। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान संकट का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। जिले में घरेलू गैस की किल्लत और कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी ने हालात चिंताजनक बना दिए हैं। स्थिति यह है कि गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए थाना परिसरों तक में वितरण की व्यवस्था करनी पड़ रही है—जो पहले कभी देखने को नहीं मिला। गैस की कीमतों में उछाल का असर बाजार पर साफ दिख रहा है। होटल, मिठाई दुकान, नाश्ता ठेला से लेकर छोटे कारोबारियों तक—सभी ने अपने खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ा दिए हैं। मिठाइयों के रेट में तेज बढ़ोतरी हुई है, वहीं आम नाश्ते तक महंगे हो गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि गैस महंगी होने से लागत बढ़ गई है, इसलिए कीमत बढ़ाना मजबूरी है। मध्यम और गरीब परिवारों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं। एक ओर गैस महंगी और दुर्लभ हो गई है, दूसरी ओर विकल्प के रूप में कोयले की कीमतों में भी उछाल आ गया है। इंडक्शन चूल्हा एक विकल्प जरूर है, लेकिन जिले में खराब बिजली व्यवस्था लोगों के लिए नई समस्या बन गई है। लगातार कटौती और आंख-मिचौली के कारण लोग बिजली पर निर्भर होकर खाना बनाने की स्थिति में नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की स्थिति बेहद लचर है। मेंटेनेंस के नाम पर हर हफ्ते बिजली काट दी जाती है, जबकि शहर में जगह-जगह तार जर्जर हालत में फैले हुए हैं। प्रशासनिक स्तर पर सुधार के दावे जरूर किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। उधर, जानकारों का कहना है कि फिलहाल चुनावी माहौल के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं, लेकिन आने वाले समय में इनमें भी भारी बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा हुआ तो ट्रांसपोर्टिंग महंगी होगी और रोजमर्रा की हर चीज पर इसका सीधा असर पड़ेगा। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स में कुछ कटौती की गई है, लेकिन इसके बावजूद तेल कंपनियों पर दबाव बना हुआ है और बाजार में राहत नहीं दिख रही। कुल मिलाकर, गैस संकट, महंगाई और खराब बिजली व्यवस्था ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। खासकर गृहिणियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जो न गैस पर भरोसा कर पा रही हैं और न ही बिजली पर। ऐसे में लोग मजबूरी में फिर से कोयले की ओर लौट रहे हैं, जो न सिर्फ महंगा है बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदेह भी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर स्थिति को लेकर कितनी जल्दी ठोस कदम उठाती है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

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