पाकुड़। मंगलवार को पाकुड़ गुरुद्वारे में सिखों के नौवें गुरु गुरुतेग बहादुर जी का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही गुरुद्वारे में साध संगत की भारी भीड़ उमड़ी और कीर्तन, पाठ तथा अरदास के साथ पूरा वातावरण गुरु की वाणी से भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारे के पाठी भाई नवनीत सिंह द्वारा किए गए कीर्तन पाठ से हुई, जिसमें संगत पूरी तरह गुरु की शिक्षाओं में लीन नजर आई। इसके बाद अरदास की गई और प्रसाद वितरण किया गया। गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए चाय और नाश्ते की भी विशेष व्यवस्था की गई थी। इस अवसर पर गुरुद्वारा के कोषाध्यक्ष कुलदीप सिंह ने कहा कि यह दिन पूरे सिख समाज के लिए गर्व और श्रद्धा का दिन है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अद्वितीय बलिदान दिया, जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा।
गौरतलब है कि गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 7 अप्रैल 1621 को अमृतसर में हुआ था। वे छठे गुरु गुरु हरगोबिंद सिंह जी के सबसे छोटे पुत्र थे। उनका बचपन का नाम त्याग मल था। बचपन से ही वे आध्यात्मिक प्रवृत्ति और शस्त्र विद्या में निपुण थे। उस समय मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में धार्मिक अत्याचार बढ़ रहे थे। कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म और मानव अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाई। इसी संघर्ष के दौरान 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में उनका बलिदान हुआ, जब उन्होंने धर्म की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी वाणी और शिक्षाएं आज भी मानवता को सत्य, धैर्य, निडरता और ईश्वर भक्ति का संदेश देती हैं। उनकी वाणी का संकलन श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी मिलता है।
कार्यक्रम के अंत में संगत ने गुरु के चरणों में अरदास कर विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की। पूरा गुरुद्वारा परिसर “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह” के जयकारों से गूंज उठा।






