पाकुड़: जिले में निजी विद्यालयों की कथित मनमानी के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। राष्ट्रीय संगठन रामभक्त सेवा दल ने शनिवार को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा सचिव समेत जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की। पत्र के साथ हाल ही में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान की प्रति भी संलग्न की गई है। संगठन के जिला अध्यक्ष सनातनी रतन भगत ने बताया कि पहले भी उपायुक्त को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसी वजह से अब राज्य स्तर तक शिकायत पहुंचाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी विद्यालय बिना रोक-टोक विभिन्न नामों पर शुल्क वसूल रहे हैं। री-एडमिशन शुल्क हटाकर अन्य मदों में फीस ली जा रही है, जबकि हर महीने ट्यूशन फीस पहले से ही ली जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भवन विद्यालय का है तो मेंटेनेंस का खर्च अभिभावकों से क्यों लिया जा रहा है। साथ ही आरोप लगाया कि कई स्कूल अपने आसपास किराए के मकानों में बिना बोर्ड लगाए किताब, कॉपी, बैग और ड्रेस बेच रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। संगठन के सदस्य सनातनी सागर ने कहा कि विरोध के बावजूद कोई असर नहीं पड़ रहा है, ऐसे में जल्द ही आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने अभिभावकों से आगे आकर आवाज उठाने की अपील की और कहा कि यह सभी की साझा लड़ाई है। वहीं, जिप सदस्य पिंकी मंडल ने बताया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिता पूर्ति को भी ज्ञापन सौंपा गया। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने निजी स्कूलों पर कार्रवाई को लेकर असमर्थता जताई। इससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, निजी स्कूलों की फीस को लेकर जिले में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।







