मसूरी की दोस्ती से एक जिले की जिम्मेदारी तक—अंजलि और कृष्णकांत की साझेदारी बनी प्रेरणा
महाराष्ट्र के जालना जिले में इन दिनों एक ऐसी IAS जोड़ी सुर्खियों में है, जो प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ अपने मजबूत रिश्ते के लिए भी मिसाल बन रही है। IAS अंजलि शर्मा और IAS कृष्णकांत कनबाडिया न सिर्फ अपने-अपने दायित्वों को बखूबी निभा रहे हैं, बल्कि साथ मिलकर शहर और गांव—दोनों के विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। कभी 1300 किलोमीटर की दूरी ने इस दंपती को अलग-अलग राज्यों में रहने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन आज वही जोड़ी एक ही जिले में तैनात होकर प्रशासन की दो अहम धुरी संभाल रही है। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन धैर्य, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास ने हर चुनौती को पार कर लिया। अंजलि शर्मा, जिनकी परवरिश दिल्ली में हुई, ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में पहली ही कोशिश में 185वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्तमान में वह जालना नगर निगम की आयुक्त के रूप में शहर के विकास, स्वच्छता, आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटी हैं। वहीं, कृष्णकांत कनबाडिया राजस्थान के नागौर जिले के कुचामन शहर के निवासी हैं। डॉक्टर पृष्ठभूमि से आने वाले कृष्णकांत ने चौथे प्रयास में 382वीं रैंक हासिल कर सिविल सेवा में सफलता पाई। उनका संघर्ष इस बात का उदाहरण है कि लगातार प्रयास और दृढ़ निश्चय से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। दोनों की मुलाकात मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के दौरान हुई थी। यहीं से शुरू हुई दोस्ती समय के साथ गहरे रिश्ते में बदल गई। ट्रेनिंग के बाद अलग-अलग कैडर में पोस्टिंग के कारण दोनों को लंबी दूरी का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके रिश्ते की मजबूती ने इस दूरी को कभी बाधा नहीं बनने दिया। शादी के बाद कृष्णकांत कनबाडिया ने एक बड़ा फैसला लेते हुए जनवरी 2026 में अपना कैडर बदलकर महाराष्ट्र आने का निर्णय लिया, ताकि दोनों साथ रह सकें। यह निर्णय उनके रिश्ते के प्रति प्रतिबद्धता और प्राथमिकता को साफ तौर पर दर्शाता है। हाल ही में हुए तबादलों में यह दंपती एक ही जिले जालना में तैनात हुआ है। जहां अंजलि शर्मा शहर की कमान संभाल रही हैं, वहीं कृष्णकांत कनबाडिया जिला परिषद के CEO के रूप में ग्रामीण विकास को नई गति दे रहे हैं। एक ही जिले में शहर और गांव—दोनों की जिम्मेदारी इस IAS जोड़ी के कंधों पर है। यह कहानी केवल एक दंपती की नहीं, बल्कि मेहनत, संघर्ष, धैर्य और रिश्तों की ताकत की जीवंत मिसाल है। एक ओर पहली कोशिश में सफलता की चमक है, तो दूसरी ओर लगातार प्रयासों से मिली जीत की गहराई। दूरी और चुनौतियों के बावजूद साथ रहने और साथ काम करने का उनका यह सफर आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। आईएस कृष्णकांत कनबाडिया ट्रेनिंग पीरियड में पाकुड़ के कई विभागों में रह चुके है।






