पाकुड़ का महात्मा गांधी बस स्टैंड इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्था के कारण यात्रियों के लिए परेशानी का केंद्र बना हुआ है। आधुनिकता के दावे करने वाला यह बस स्टैंड जमीनी हकीकत में बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित नजर आ रहा है। रविवार को त्रिपुरा से लौटे प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ यहां पहुंची, तो व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आ गई। तपती धूप और उमस भरे मौसम में यात्रियों को न तो पीने का पर्याप्त पानी मिला और न ही बैठने या ठहरने की समुचित व्यवस्था।
बैठने और छांव का अभाव
बस स्टैंड के यात्री शेड में बैठने की पर्याप्त जगह नहीं है। थके-हारे मजदूर और उनके परिवार सड़क किनारे धूप और धूल में बैठकर बस का इंतजार करते दिखे।
सफाई और पंखों की व्यवस्था ठप।
शेड के नीचे पंखे बंद पड़े हैं और सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। गंदगी और बदबू के बीच यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
पानी के लिए एक चापाकल ही सहारा।
भीषण गर्मी में पूरे परिसर में सिर्फ एक चापाकल के सहारे यात्रियों को पानी मिल रहा है। उस पर भीड़ लगी रहती है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मजदूरों में नाराजगी।
प्रवासी मजदूरों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि किराया देने के बावजूद उन्हें सुविधाएं नहीं मिलतीं। न बैठने की जगह है, न ही टिकट काउंटर के पास कोई व्यवस्था। यहां तक कि बस कर्मियों के लिए भी उचित स्थान नहीं है।
नगर प्रशासन पर उठे सवाल
बस स्टैंड की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। विकास के दावों के बीच यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या नगर परिषद और संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान करेंगे या फिर यात्री यूं ही परेशान होते रहेंगे।








