कच्चे घरों में जिंदगी गुजारने को मजबूर ग्रामीण, आवास योजना के इंतजार में बढ़ी नाराजगी
पाकुड़: जहाँ एक तरफ सरकार ‘हर हाथ को काम और हर सिर पर छत’ का वादा करती है, वहीं सदर प्रखंड के पतरापाड़ा गांव में ग्रामीण आज भी एक अदद पक्के मकान के लिए तरस रहे हैं। दरअसल पाकुड़ जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत सोनाजोड़ी पंचायत के पतरापाड़ा गांव के ग्रामीणों कच्चे और जर्जर घरों में रह रहे कई परिवारों का जीवन संकट में है। बारिश के दौरान घरों की छतों से पानी टपकता है, जिससे लोगों को रातभर जागकर समय बिताना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सरकारी आवास का आश्वासन मिल रहा है, लेकिन अब तक उन्हें पक्का घर नहीं मिला। ग्रामीण महिला श्रीमती देवी ने बताया कि उनका घर मिट्टी और खपरैल का बना हुआ है। बारिश होने पर घर के अंदर पानी भर जाता है, जिससे उनके छोटे बच्चों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों से अधिकारी घर आकर फोटो खींचते हैं और आवास दिलाने का भरोसा देते हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे खुद से घर नहीं बनवा सकतीं। वहीं रुक्मणी पुजहरनी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उनके पास पक्का मकान नहीं है उन्हें सिर्फ पेंशन मिलती है, लेकिन राशन कार्ड में नाम की गड़बड़ी के कारण राशन नहीं मिल पा रहा है। पहले कुछ चावल मिल जाते थे, लेकिन अब बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद वह भी बंद हो गया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे-बहू अलग रहते हैं और उनकी कोई देखभाल नहीं करता। गुजारा करने के लिए उन्हें झोला और कटोरी लेकर लोगों से मांगना पड़ता है।
ग्रामीण महिला लाखो देवी ने बताया कि पिछले चार वर्षों से अधिकारी उनके आधार कार्ड, बैंक पासबुक और घर की तस्वीरें लेकर जा रहे हैं। हर बार कहा जाता है कि पैसा खाते में आ गया है और जल्द घर बन जाएगा, लेकिन आज तक कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि एक ही कमरे में खाना बनाना, सोना और बकरियां बांधना पड़ता है। बेटे की शादी होने वाली है, ऐसे में रहने की समस्या को लेकर वे बेहद चिंतित हैं। इसी तरह जसु देवी ने बताया कि उनका घर अधूरा पड़ा हुआ है। केवल छत की ढलाई हुई है, लेकिन खिड़की-दरवाजे और अन्य काम नहीं हुए हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे छोटे बच्चों के साथ रहना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने प्रशासन से घर का काम पूरा कराने की मांग की। ग्रामीण विभीषण रविदास ने बताया कि उन्हें लगभग 20 साल पहले आवास मिला था, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बीती रात हुई बारिश में छत से लगातार पानी टपकता रहा और तिरपाल लगाने के बावजूद राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि गांव में लगभग 150 घर और 300 से अधिक लोग रहते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 10 परिवारों को ही आवास योजना का लाभ मिला है।
क्या कहती हैं मुखिया?
इस संबंध में सोनाजोड़ी पंचायत की मुखिया मोनिका सोरेन ने कहा कि उन्हें बीती रात हुई बारिश और पतरापाड़ा गांव की स्थिति की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि कई घरों में बारिश के कारण समस्या उत्पन्न हुई है और वे इसकी सूचना संबंधित विभाग को देने का प्रयास करेंगी। मुखिया ने बताया कि अब तक जितना भी आवास आवंटन पंचायत को मिला था, उसे जरूरतमंदों के बीच वितरित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए विभाग को सूची भी भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि नया आवास आवंटन मिलते ही पतरापाड़ा सहित पूरी पंचायत की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जरूरतमंद परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें।








