इकबाल हुसैन
महेशपुर (पाकुड़)। एक चौकीदार की आखिरी इच्छा सामाजिक विवाद में उलझ गई। पैतृक गांव में दफनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि 30 घंटे तक शव अंतिम संस्कार का इंतजार करता रहा और शहरग्राम मुख्य सड़क करीब 12 घंटे तक जाम रही। आखिरकार प्रशासन की पहल पर गुरुवार शाम शव का अंतिम संस्कार बगल के गांव धावाडंगाल में कराया गया। जानकारी के अनुसार, शहरग्राम पंचायत से जुड़े चौकीदार भीम सोरेन का 5 मई को पाकुड़ सदर अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। उनकी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव पीपरजोड़ी में हो। इसी के तहत परिजन शव लेकर गांव पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि मृतक वर्षों पहले गांव छोड़ चुके थे और सामाजिक रूप से सक्रिय नहीं थे। इस फैसले से आक्रोशित परिजनों ने बुधवार दोपहर शहरग्राम मुख्य सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश शुरू हुई। एसडीओ, बीडीओ और सीओ समेत कई अधिकारियों ने घंटों मशक्कत की, लेकिन देर रात तक सहमति नहीं बन सकी। करीब 24 घंटे तक वार्ता चलती रही। इस दौरान रिश्तेदार की जमीन पर दफनाने का प्रस्ताव भी आया, लेकिन शर्तों के कारण बात नहीं बन पाई। लगातार बढ़ते तनाव के बीच आखिरकार परिजनों ने पैतृक गांव में अंतिम संस्कार की जिद छोड़ दी। इसके बाद प्रशासन की मौजूदगी में गुरुवार शाम शव को धावाडंगाल गांव ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार कराया गया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सड़क से जाम हटाया गया और हालात सामान्य हुए, लेकिन यह घटना समाज में संवेदनशीलता और आपसी समरसता पर बड़ा सवाल खड़ा कर गई। 30 घंटे तक अंतिम संस्कार के इंतजार में पड़ा शव और ‘दो गज जमीन’ के लिए खड़ा हुआ विवाद इंसानियत को झकझोरने वाला बन गया।








