पाकुड़ के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के कई गांव इन दिनों जंगली सियारों के खौफ में जी रहे हैं। सियारों के झुंड द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों ने पूरे इलाके की शांति छीन ली है। अब तक एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद से गांवों में दहशत का माहौल है और लोग रात होते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल ‘नाइट रेस्क्यू’ ऑपरेशन शुरू कर दिया है। विशेष टीम का गठन कर प्रभावित गांवों में रात के समय गश्त तेज कर दी गई है। इसके साथ ही विभाग की ओर से ‘रात्रि गोष्ठी’ आयोजित कर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि ऐसे हमलों से बचाव किया जा सके। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सियार आमतौर पर छोटे बच्चों को आसान शिकार मानते हैं। इसे देखते हुए लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि रात में बच्चों को अकेला न छोड़ें, समूह में ही बाहर निकलें और टॉर्च या लाठी साथ रखें। साथ ही बस्तियों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने को कहा गया है, ताकि जंगली जानवरों को छिपने का मौका न मिले।
इधर, वन विभाग ने मानवीय पहल करते हुए मृतक बच्ची के परिजनों को ₹50,000 की तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि शेष मुआवजा राशि भी सरकारी प्रक्रिया पूरी होते ही जल्द दी जाएगी।
फिलहाल वन विभाग की टीम लगातार रात में दबिश देकर सियारों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने में जुटी है। बावजूद इसके, ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इन सियारों को पूरी तरह पकड़ा या हटाया नहीं जाता, तब तक उनका डर खत्म होना मुश्किल है।






