पाकुड़। पचुवाड़ा मध्य एवं उत्तर कोयला खदान प्रभावित क्षेत्र के विस्थापितों ने ‘पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा’ के बैनर तले शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रखा। धरनास्थल पर जुटे विस्थापितों ने जिला प्रशासन और खनन कंपनियों पर उनकी मांगों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि पंजाब और पश्चिम बंगाल के सरकारी ऊर्जा निगम पीएसपीसीएल एवं डब्ल्यूबीपीडीसीएल ने अब तक नियमानुसार रैयती जमीन का अधिग्रहण नहीं किया है, जबकि संबंधित क्षेत्र में ब्लास्टिंग और कोयला खनन कार्य लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निर्देश के बावजूद विस्थापितों की अंतिम दावेदारी सूची अब तक कंपनियों को नहीं भेजी गई है। विस्थापितों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में कई बार उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई का आश्वासन भी मिला, लेकिन न तो समन्वय बैठक बुलाई गई और न ही दावेदारी सूची भेजी गई। मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि बारूद मैगजीन का लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद क्षेत्र में भारी ब्लास्टिंग की जा रही है।
धरनार्थियों ने झारखंड मंत्रिमंडल द्वारा निर्धारित बाजार दर के आधार पर चार गुना मुआवजा, सभी दावेदारों को सरकारी नौकरी अथवा वैकल्पिक आर्थिक पैकेज, स्थानीय लोगों को खनन एवं परिवहन कार्यों में प्राथमिकता तथा डीएमएफटी और सीएसआर योजनाओं में प्रभावित क्षेत्र को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन शीघ्र दोनों कंपनियों के अधिकारियों और रैयत प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समाधान नहीं निकालता है, तो प्रभावित ग्रामीण खनन कार्य अनिश्चितकाल के लिए बंद करा देंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और राज्य सरकार की होगी।








