डब्लूबीपीडीसीएल और बीजीआर माइनिंग के जन-कल्याण कार्यों से रैयत संतुष्ट, बोले- गुमराह कर रहे बाहरी लोग
पाकुड़: पाकुड़ के अमड़ापाड़ा स्थित पचुवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले विस्थापितों एवं प्रभावित रैयतों की एक आवश्यक सामूहिक बैठक के बाद सोमवार को क्षेत्र में अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली।’अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति’ के बैनर तले भारी संख्या में स्थानीय विस्थापित और ग्रामीण पाकुड़ समाहरनालय पहुंचे। वहां उन्होंने जिला उपायुक्त (डीसी) मेघा भारद्वाज से विशेष मुलाकात कर उन्हें अपना आधिकारिक मांग पत्र सौंपा।सौंपे गए ज्ञापन के जरिए समिति ने स्थानीय जिला प्रशासन की निष्पक्ष कार्यशैली की मुक्त कंठ से सराहना की है। इसके साथ ही, कोल ब्लॉक संचालक कंपनी पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (WBPDCL) और एमडीओ मैसर्स बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा लिमिटेड (BGRMIL) द्वारा क्षेत्र में चलाए जा रहे जन-कल्याणकारी कार्यों पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया गया है।
जन-कल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीणों को मिल रहा सीधा लाभ
समिति ने जिला प्रशासन को सौंपे गए विवरण में बताया कि कंपनियों के माध्यम से विस्थापितों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA) रिपोर्ट के तहत अब तक 376 पात्र ग्रामीणों को नियमित रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 1,176 विधवा व वृद्ध महिलाओं को ‘पत्ता प्लेट योजना’ के तहत नियमित रूप से पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। विस्थापितों की सहूलियत के लिए विशुनपुर और चिलगो (चितलो) आर एंड आर कॉलोनियों में अत्याधुनिक आधुनिक आरओ वाटर प्लांट स्थापित किए गए हैं। साथ ही वहां कौशल विकास केंद्र भी सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को सीधे मदद मिल रही है।
ग्रामीणों को अशिक्षित कहकर अपमानित करना बंद करें स्वार्थी तत्व
अध्यक्ष सुरेश टुडू एवं सचिव रमेश मुर्मू ने बताया कि मुनी हांसदा, सागर मीणा और मोहन मुर्मू जैसे कुछ बाहरी और अराजक तत्व निजी स्वार्थ में क्षेत्र की शांति व्यवस्था को भंग करने का प्रयास कर रहे हैं। वे जिला प्रशासन के समक्ष लगातार भ्रामक और तथ्यहीन बयानबाजी कर रहे हैं और सीधे-साधे ग्रामीणों को ‘निरीह व अनपढ़’ कहकर अपमानित कर रहे हैं। हकीकत यह है कि सभी प्रभावित रैयत कंपनियों द्वारा मिल रही सुविधाओं और अपने जीवन स्तर में हो रहे सुधार से पूरी तरह संतुष्ट हैं।”
बाहरी तत्वों पर सख्त कार्रवाई और विधिक मान्यता की मांग
ज्ञापन के माध्यम से समिति ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीणों को गुमराह करने और सरकारी व प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने वाले ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ अविलंब सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, विस्थापितों और प्रभावित रैयतों की समस्याओं के त्वरित व प्रभावी लोकतांत्रिक समाधान के लिए इस अधिकृत समिति को विधिक मान्यता देने और इसका जल्द से जल्द सरकारी निबंधन कराने का अनुरोध किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निबंधन होने के बाद इस समिति को प्रशासन और कंपनी के बीच संवाद का एकमात्र आधिकारिक माध्यम माना जा सके, ताकि भविष्य में अप्पर समाहर्ता, एसडीओ, एसडीपीओ, डीएलएओ और अंचल अधिकारी (CO) की उपस्थिति में सभी मसलों का निपटारा सुचारू रूप से हो सके। समाहरणालय परिसर में ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष सुरेश टुडू, उपाध्यक्ष बानेश्वर टुडू, सचिव रमेश मुर्मू और उपसचिव अन्द्रियस मुर्मू के साथ वकील बेसरा, महातन टुडू, सोम हेम्ब्रम, प्रधान हाँसदा, मुंशी टुडू, प्रधान सोरेन, बबलू मुर्मू, प्रधान टुडू, कार्तिक पहाड़िया, साहेबजन मरांडी, रूपाय देहरी, सुनील देहरी, हेमलाल मुर्मू, साईमन मरांडी, गोपीन हेम्ब्रम, महादेव राय, बबलू हांसदा, सुरेन्द्र बेसरा, रायसेन टुडू, रघु टुडू, मुन्ना टुडू, बाबूलाल मुर्मू, प्रधान हेम्ब्रम, मानबेल हांसदा, सुनातन हांसदा सहित दर्जनों विस्थापित और प्रभावित रैयत मुख्य रूप से उपस्थित थे।







