बोले एसपी— शहीदों की बदौलत आज नक्सल मुक्त है संथाल परगना, स्थापित की जाएंगी अन्य पांच वीर जवानों की प्रतिमाएं
पाकुड़: काठीकुंड नक्सली हमले में शहीद हुए तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और पांच जवानों की शहादत को गुरुवार (2 जुलाई) को नम आंखों से याद किया गया। पुलिस परिवार की ओर से आयोजित विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान पाकुड़ एसपी अनुदिप सिंह, एसडीपीओ कुमार गौरव, डीडीसी अरविंद कुमार लाल, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन और डीटीओ मो० मुजाहिद अंसारी सहित जिला प्रशासन के आला अधिकारियों व शहीदों के परिजनों ने शहीद एसपी अमरजीत बलिहार की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर वीर आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई।कार्यक्रम में एसपी अनुदिप सिंह ने शहादत को नमन करते हुए शहीद जवानों के परिजनों और हमले में घायल हुए निजी चालक धनराज मड़ैया को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

शहीदों के लहू से सिंचकर नक्सल मुक्त हुआ पाकुड़: एसपी
मौके पर संबोधित करते हुए एसपी अनुदिप सिंह ने कहा कि एसपी अमरजीत बलिहार और उनके साथियों के सर्वोच्च बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने गर्व से कहा आज पाकुड़ जिला और पूरा संथाल परगना अगर पूरी तरह नक्सल मुक्त है, तो इसमें हमारे इन वीर शहीदों की अहम भूमिका रही है। हम पुलिस परिवार आज यह संकल्प लेते हैं कि देश, राज्य और पाकुड़ की जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
एसपी ने घोषणा की कि हमले में शहीद हुए अन्य पांच जवानों की स्मृति में भी जल्द ही प्रतिमाएं स्थापित कराई जाएंगी।

2 जुलाई 2013 का वह काला दिन
बता दें कि 2 जुलाई 2013 को पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार दुमका में डीआईजी की बैठक से लौट रहे थे। इसी दौरान काठीकुंड थाना क्षेत्र के जमनीनाला के पास घात लगाए बैठे नक्सलियों ने उनके काफिले पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया था। इस कायरतापूर्ण हमले में एसपी अमरजीत बलिहार, उनके अंगरक्षक चंदन थापा, चालक वीरेंद्र श्रीवास्तव, जवान राजीव कुमार शर्मा, संतोष मंडल और मनोज हेम्ब्रम वीरगति को प्राप्त हुए थे, जबकि निजी चालक धनराज मड़ैया व एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे।

बड़े अभियान के बाद शांत हुआ संथाल परगना
इस भीषण हमले के बाद झारखंड पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ी थी। पाकुड़, दुमका और गोड्डा समेत पूरे संथाल परगना में जबरदस्त नक्सल विरोधी अभियान चलाया गया। कई बड़े नक्सली सलाखों के पीछे भेजे गए और कई मुठभेड़ में ढेर हुए। पुलिस की इसी मुस्तैदी का नतीजा है कि आज पूरा संथाल परगना क्षेत्र भयमुक्त और नक्सल मुक्त हो चुका है।

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