चिलगो समेत कोयला परियोजना क्षेत्र के गांवों में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष, विस्थापितों से सुनीं रोजगार, आवास और शिक्षा की समस्याएं।
अमर भगत
अमड़ापाड़ा/पाकुड़। पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी शुक्रवार को अमड़ापाड़ा पहुंचे और पचुवाड़ा सेंट्रल व नॉर्थ कोल परियोजना क्षेत्र के गांवों का दौरा कर विस्थापितों की समस्याएं सुनीं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने चिलगो, बिशनपुर, कठालडीह समेत विभिन्न गांवों में जाकर विस्थापित परिवारों की स्थिति का जायजा लिया। चिलगो में बाबूलाल मरांडी ने विस्थापितों के लिए बनाए गए आवासीय कॉलोनी का निरीक्षण किया। यहां 118 विस्थापित परिवारों को बसाया गया है। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि जमीन अधिग्रहण के बाद उनकी आजीविका का पारंपरिक आधार खत्म हो गया, लेकिन रोजगार का स्थायी इंतजाम नहीं हुआ। विस्थापितों ने आवास में जगह की कमी, मकानों की गुणवत्ता, बच्चों की बेहतर शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। ग्रामीणों का कहना था कि संयुक्त परिवारों के लिए मौजूदा आवास पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों के बड़े होने और आने वाली पीढ़ियों के परिवार बढ़ने के बाद रहने की समस्या और गंभीर होगी। ग्रामीणों ने कहा कि खनन शुरू हुए छह-सात वर्ष बीतने के बावजूद कई मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। समस्याएं सुनने के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विस्थापन और पुनर्वास की योजना केवल वर्तमान को ध्यान में रखकर नहीं बनाई जानी चाहिए। सरकार को कम से कम चार पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रोटी, कपड़ा, मकान, रोजगार और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने पर आदिवासी परिवार पलायन को मजबूर होंगे।
उन्होंने आश्वस्त किया कि विस्थापितों की समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा। जरूरत पड़ी तो भाजपा उनके हक और अधिकार के लिए आंदोलन भी करेगी।







