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September 2, 2026 11:31 pm

बाबूलाल मरांडी ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, संथाल परगना में घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव पर जताई चिंता

रांची। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर संथाल परगना में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ, जनसांख्यिकीय बदलाव और सरकारी व आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों की जांच कराने की मांग की है। 31 अगस्त को भेजे गए पत्र में उन्होंने विशेष अभियान चलाकर संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान, मतदाता सूची की गहन जांच और निर्वासन की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है।
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कहा है कि संथाल परगना के पाकुड़, साहिबगंज सहित कई क्षेत्रों में उन्हें तेजी से बदलते सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिदृश्य की जानकारी मिली है। उन्होंने वर्ष 2019 से 2024 के बीच के मतदाता आंकड़ों का हवाला देते हुए विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में हुई वृद्धि को चिंताजनक बताया है। उनके अनुसार, पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या में 24 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि उनके द्वारा ‘एक वर्ग विशेष’ के मतदाताओं की वृद्धि दर 40.9 प्रतिशत बताई गई है। पत्र में लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, राजमहल, बरहेट, जरमुंडी, मधुपुर, जामताड़ा, सारठ, नाला, पोड़ैयाहाट, महगामा, दुमका और गोड्डा विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े भी दिए गए हैं। मरांडी ने दावा किया है कि इन क्षेत्रों में भी संबंधित वर्ग के मतदाताओं की वृद्धि दर अन्य मतदाताओं की तुलना में अधिक रही है।

‘आदिवासी आबादी के अनुपात में गिरावट चिंता का विषय’

बाबूलाल मरांडी ने 2001 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए पाकुड़ और साहिबगंज में मुस्लिम आबादी में वृद्धि तथा मूलवासी एवं आदिवासी आबादी के अनुपात में कमी का दावा किया है। उन्होंने इसे संथाल परगना की जनजातीय अस्मिता के लिए गंभीर विषय बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) के प्रावधानों के बावजूद सरकारी, गोचर और आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आ रही हैं। पत्र में फर्जी वंशावली, जाली आधार कार्ड और अवैध जन्म प्रमाणपत्र के माध्यम से संदिग्ध लोगों को स्थापित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

राजनीतिक संरक्षण का भी लगाया आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल और स्थानीय प्रशासन के एक वर्ग की कथित मिलीभगत से अवैध घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अवैध घुसपैठ और कथित राजनीतिक-प्रशासनिक मिलीभगत पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो संथाल परगना में मूल संथाल समाज के अस्तित्व और क्षेत्र की पहचान पर गंभीर असर पड़ सकता है।

केंद्र की निगरानी में विशेष अभियान की मांग

मरांडी ने गृह मंत्री से संथाल परगना के सीमावर्ती जिलों में केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष निगरानी में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने 2003-04 के पुराने खतियान एवं भू-अभिलेखों के आधार पर वंशावली का तकनीकी सत्यापन कराने का सुझाव दिया है। इसके अलावा उन्होंने संथाल परगना में तत्काल सुसज्जित डिटेंशन सेंटर स्थापित करने, संदिग्ध अवैध प्रवासियों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई और निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की है। साथ ही भारत निर्वाचन आयोग के माध्यम से मतदाता सूचियों की गहन जांच कर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शामिल नामों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है।बाबूलाल मरांडी ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले कथित रैकेट और उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। उन्होंने गृह मंत्री से राष्ट्रहित, सीमाई सुरक्षा और झारखंड के जनजातीय समाज के हित में इस पूरे मामले पर त्वरित एवं निर्णायक कार्रवाई का आग्रह किया है।

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