दाल-तेल मिल लगाने और बंगाल के बड़े कारोबारियों से संपर्क के निर्देश, चना-मसूर के प्रमाणित बीज उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की कमाई।
पाकुड़। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए जिले में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। शनिवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में आत्मा शासकीय निकाय एवं जिला खाद्य सुरक्षा मिशन कार्यकारी समिति की बैठक हुई। इसमें कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं की समीक्षा के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने जिले में दाल मिल और तेल मिल जैसी बड़ी कृषि प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और जिला कृषि पदाधिकारी को प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज का प्रसंस्करण जिले में ही होने से उत्पाद का मूल्य बढ़ेगा और किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बंगाल के कारोबारियों से बनेगा सीधा बाजार संपर्क
बैठक में किसानों की उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने बंगाल के बड़े व्यापारियों और संभावित बाजारों से संपर्क स्थापित करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे जिलों में भटकना नहीं पड़े। उन्होंने बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस पहल करने को कहा।
उपायुक्त ने कहा कि किसान को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला से जोड़ना जरूरी है। इससे किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे।
चना-मसूर के प्रमाणित बीज उत्पादन से बढ़ेगी अतिरिक्त आय
दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों को चना और मसूर के आधार बीज से प्रमाणित बीज उत्पादन से जोड़ने का निर्णय लिया गया। इसके लिए किसानों को वैज्ञानिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। जिले में ही गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार होने से किसानों को बेहतर बीज मिलेगा और बीज उत्पादन के जरिए उनकी अतिरिक्त आमदनी भी बढ़ेगी।
प्रशिक्षण से किसान मेला तक, गतिविधियों को मिली मंजूरी
कृषि विस्तार गतिविधियों के तहत राज्य के बाहर, राज्य के अंदर और जिले में किसानों के प्रशिक्षण एवं परिभ्रमण के लिए स्थानों का चयन किया गया। किसान-वैज्ञानिक अंतरमिलन, किसान गोष्ठी और किसान मेला सहित आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़ी गतिविधियों को भी स्वीकृति दी गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रशिक्षण और किसान मेला केवल औपचारिक आयोजन बनकर न रह जाएं। इनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे और इससे उत्पादकता, गुणवत्ता तथा किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि होनी चाहिए।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 का लेखा-जोखा जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक, आत्मा अभिषेक मिश्रा ने प्रस्तुत किया। इसके बाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के तहत विभिन्न गतिविधियों और कार्ययोजनाओं पर चर्चा कर आवश्यक निर्णय लिए गए। बैठक में जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. माया कुमारी, उप परियोजना निदेशक, जिला उद्योग केंद्र के ईओडीबी मैनेजर, जिला परिषद सदस्य, समिति के अन्य सदस्य एवं किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।






