पाकुड़, अमड़ापाड़ा प्रखंड के डुमरचीर पंचायत के विभिन्न गांवों के सैकड़ों ग्रामीण मंगलवार को समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त मेघा भारद्वाज से मिलकर आवास प्लस सूची से नाम गायब होने की शिकायत की। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र लाभुकों को आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास प्लस सर्वे के दौरान पंचायत समिति सदस्य राजेंद्र हेम्ब्रम ने कथित तौर पर 500 रुपये लिए। वहीं, पहली सूची में नाम आने के बाद आवास दिलाने के नाम पर पंचायत सचिव ढ़ेना हेम्ब्रम और पंचायत समिति सदस्य राजेंद्र हेम्ब्रम द्वारा लाभुकों से पांच-पांच हजार रुपये की कथित मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि वे गरीब आदिवासी परिवारों से हैं और राशि देने में सक्षम नहीं हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से जर्जर और झोपड़ीनुमा मकानों में रहने को मजबूर हैं। सूची में नाम आने से पक्के मकान की उम्मीद जगी थी, लेकिन बाद में नाम गायब होने से निराशा हुई। ग्रामीणों के अनुसार, 6 सितंबर को बीडीओ को आवेदन देकर शिकायत की गई थी और जांच भी हुई, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने डीसी से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की गुहार लगाई।






