ग्रामीणों ने उठाए सवाल, दर्जनों चापाकलों की मरम्मत पर खर्च का हिसाब जानना चाहते हैं लोग; जांच से सामने आएगी हकीकत।
पाकुड़। हिरणपुर प्रखंड की मांझलाडीह पंचायत में चापाकल मरम्मत पर खर्च की गई राशि को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, एक चापाकल की मरम्मत पर दो लाख रुपये खर्च होने की चर्चा है। हालांकि, इस राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ग्रामीणों के मन में सवाल है कि यदि एक चापाकल पर इतनी राशि खर्च हुई, तो पंचायत के दर्जनों चापाकलों की मरम्मत पर कुल कितना सरकारी पैसा खर्च किया गया? ग्रामीणों के लिए यह मामला केवल खर्च का नहीं, बल्कि सरकारी राशि के सही इस्तेमाल का भी है। उनका सवाल है कि पंचायत में कितने चापाकलों की मरम्मत कराई गई, किन-किन स्थानों पर काम हुआ और प्रत्येक चापाकल पर कितनी राशि खर्च की गई? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

मरम्मत पर खर्च कितना, काम कितना?
ग्रामीणों के बीच उठ रहे सवालों के बीच मरम्मत कार्यों की सूची, प्राक्कलन, बिल-वाउचर और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच जरूरी है। साथ ही, संबंधित चापाकलों का स्थल निरीक्षण कर यह सत्यापित किया जाना चाहिए कि वास्तव में मरम्मत हुई या नहीं और वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है। यदि एक चापाकल पर दो लाख रुपये खर्च होने की चर्चा सही है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इतनी राशि किन कार्यों पर खर्च की गई। वहीं, पंचायत में मरम्मत कराए गए अन्य चापाकलों पर हुए खर्च का भी पूरा ब्योरा सामने आना चाहिए। इससे ग्रामीणों के बीच उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिल सकेगा।
ग्रामीणों की मांग, खर्च का हिसाब हो स्पष्ट।
ग्रामीणों का मानना है कि सरकारी योजनाओं और मरम्मत कार्यों में पारदर्शिता जरूरी है। चापाकल ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की महत्वपूर्ण सुविधा हैं। ऐसे में मरम्मत के नाम पर खर्च की गई राशि और वास्तविक काम की स्थिति की जांच होनी चाहिए। संबंधित अधिकारियों को खर्च का विवरण स्पष्ट करते हुए जरूरत पड़ने पर स्थल जांच करानी चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—मांझलाडीह पंचायत में चापाकल मरम्मत पर कुल कितनी राशि खर्च हुई और क्या खर्च के अनुरूप काम भी हुआ? ग्रामीणों के बीच उठ रहे इन सवालों का जवाब दस्तावेजों की जांच और धरातलीय सत्यापन से ही सामने आएगा। यदि जांच में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।







