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May 12, 2026 10:33 pm

सिक्के की तरह समाज के भी होते हैं दो पहलू

*यासिर अराफात

पाकुड़। प्रकृति ने पृथ्वी में अनेकों प्राणी का प्रजनन किया है, जिसमें से सबसे श्रेष्ठ प्रकृति ने मनुष्य को बनाया है। जब से प्रकृति ने धरती बनाई है सैंकड़ो मानव इस धरती में जन्मे और इसी धरती में समा गए परन्तु इतिहास साक्षी है की सारे मानव जाती की विचारधारायें अलग अलग रही हैँ। जिस प्रकार किसी सिक्के के दो पहलु होते हैँ उसी प्रकार से प्रकृति के बनाये हुए मानव की विचारधारायें भी अलग अलग होती है। जिस प्रकार सिक्के के दो पहलू होने के बावजूद भी हम सिक्के को लेकर जीवन जीने का कार्य करते हैं,सिक्के को अपनाते हैँ ठीक उसी प्रकार पृथ्वी में आए हुए मानव के नकारात्मक तथा सकारात्मक सोच को लेकर जीवन जीने का कार्य करते है… इसी का नाम जीवन है। आपकी विचारधाराएं अलग हमारी विचारधाराएं अलग,इस कारण से आपस में एक दूसरे को शत्रु मान लेना सरासर गलत है। हमारे देश भारत वर्ष में अलग-अलग धर्म और मजहब के लोग रहते है परंतु हम आपस में एक दूसरे को अपनाने में कभी कोई संकोच नहीं करते, यही मानवता का परिचय है, और वास्तव में इसी को जीवन कहा जाता है।

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