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May 12, 2026 2:44 am

प्रेरणादायक- दिव्यांग शोधार्थी हुडिंग मरांडी ने प्राप्त की पीएचडी डिग्री, गरीबी भी ना रोक सकी रास्ता

बिक्की सन्याल

पाकुड़ (महेशपुर) । कहते हैं ना की जीवन में कुछ लक्ष्य को हासिल करना हो तो उसे एक लंबी साधना और संघर्ष से गुजरना पड़ता है और उस साधना और संघर्ष से गुजरने के बाद जब कुछ हासिल होता है तो उसकी गूंज समाज को प्रेरणा के रूप में देखने और सुनने को मिलती है, इसी को चरितार्थ करते हुए एक आदिवासी दिव्यांग छात्र हुडिंग मरांडी ने मनोविज्ञान विभाग सिद्धू कान्हू मुर्मू यूनिवर्सिटी दुमका से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। आने वाले युवाओं और छात्रों के लिए ये बहुत ही प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। दिव्यांग होने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी आर्थिक मजबूरी, गरीबी, बचपन में पिता की मृत्यु के बाद काफी कठिनाइयों से एक दिव्यांग होते हुए भी परिवार का भरण पोषण के साथ शिक्षा ग्रहण करने का संकल्प से उन्होंने ये मुकाम पाया है।आज इन्हे मनोविज्ञान विषय से डॉक्टरेट की डिग्री मिली है। पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत आने वाले बड़ा खरियोपाड़ा गाँव निवासी स्वर्गीय रावण मरांडी के पुत्र हुडिंग मरांडी बचपन से पोलियो ग्रसित होने के बावजूद और शारीरिक रूप से लाचार होने बावजूद कभी हार नहीं मानी, अपनी पीएचडी रिसर्च को पूरा किया। इस उपलब्धि का श्रेय अपने रिसर्च सुपरवाइजर डॉ अनूप कुमार साह तथा गुरु डॉ स्वतंत्र कुमार सिंह और डॉ कलानंद ठाकुर को देते हैं।उनके रिसर्च के बारे में बात करते हुए डॉ हुडिंग मरांडी ने बताया की अगर मेरे जीवन में डॉ अनूप कुमार साह और डॉ स्वतंत्र कुमार सिंह, डॉ कलानंद ठाकुर जैसे गुरु नहीं होते तो शायद मुझ जैसे निर्धन और लाचार को डॉक्टरेट की डिग्री शायद नहीं प्राप्त होती। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में अपने बेचारे लाचार बेटे के लिए एक लाचार मां नीलू सोरेन मेरे साथ आशीर्वाद देने के लिए खड़ी रहीं और हमारे महान ढाल बनकर खड़े रहे बहन होपनमय मरांडी, मरांगमई, ताला दी,किरण बेटी, अंजलिना और हर संघर्ष पथ पर साथ खड़े रहे मेरे मित्र को तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिनके सहयोग से ये उपलब्धि हासिल करने में सक्षम हो सका हूं।

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