महिला शिक्षिकाओं को भी 60-70 किमी दूर स्कूल, डीएसई ने मांगे तीन विकल्प, समाधान का दिया भरोसा
पाकुड़: पिछले छह से आठ माह से पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे सहायक आचार्यों के लिए इंतजार का अंत राहत नहीं, बल्कि नई परेशानी लेकर आया है। 8 जून को जिले के विभिन्न विद्यालयों में किए गए पदस्थापन को शिक्षकों ने अव्यावहारिक बताते हुए इसे “दंडात्मक कार्रवाई” करार दिया है। अपनी समस्याओं को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में सहायक आचार्य उपायुक्त (डीसी) कार्यालय पहुंचे और विरोध जताया।
दूरी बनी सबसे बड़ी समस्या
शिक्षकों का आरोप है कि पदस्थापन प्रक्रिया में व्यवहारिकता का अभाव रहा है। अधिकांश शिक्षकों को उनके निवास स्थान से 30 से 40 किलोमीटर दूर, जबकि कई को 60 से 70 किलोमीटर दूर के विद्यालयों में भेज दिया गया है। इससे रोजाना आवागमन करना कठिन हो गया है।
महिला शिक्षिकाएं भी परेशान।
शिक्षकों ने बताया कि पदस्थापन में महिला शिक्षिकाओं की परिस्थितियों को भी नजरअंदाज किया गया है। उन्हें भी दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात किया गया है, जहां पहुंचना रोज संभव नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि यदि अन्य जिलों की तरह सुगम और संतुलित नीति अपनाई जाती, तो यह स्थिति नहीं बनती।
डीएसई ने संभाला मोर्चा।
उपायुक्त कार्यालय परिसर में बढ़ती भीड़ और आक्रोश को देखते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।
तीन विकल्प देने का निर्देश
डीएसई ने शिक्षकों से उनकी पसंद के तीन-तीन विद्यालयों का विकल्प देकर आवेदन करने को कहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्राप्त आवेदनों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर यथासंभव समाधान निकाला जाएगा।
आश्वासन के बाद शिक्षक
शांत तो हुए, लेकिन उन्होंने पदस्थापन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है, ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो।







