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March 16, 2026 8:02 am

सोनाजोड़ी पंचायत भवन में मिशन लाइफ स्टाइल फोर एनवायरनमेंट जगरूकता अभियान के तहत कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया

इस गोष्ठी में पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना, जल संरक्षित करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना, मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देना एवं उसके उपयोग के लाभ के बारे में किसानों को बतलाया गया। जीवामृत का महत्व, इसके बनाने एवं इसके उपयोग करने का तरीका महिला समूहों को विस्तारपूर्वक बताया गया। मोहम्मद शमीम अंसारी प्रखंड तकनीकी प्रबंधक के द्वारा जीवामृत बनाने की तकनीक का प्रशिक्षण महिला समूह को दिया गया। 200 लीटर के जीवामृत टंकी मे 5 किलोग्राम ताजा गोबर, 2 किग्रा गुड़ एवं 2 किग्रा बेसन, 2 लिटर गोमूत्र मिलाकर टंकी मे 200 लीटर पानी भर देना है। यदि किसान भाइयों के पास 200 लीटर का टंकी न हो तो, वह 20 लीटर प्लास्टिक बाल्टी मे भी जीवामृत घोल तैयार कर सकते है। जितना दो सौ लीटर टंकी के लिए गोबर गुड़ बेसन आदि लगा उसी अनुपात में 20 लीटर के बाल्टी मे डालना होगा। 20 लीटर बाल्टी मे करने पर 500 ग्राम ताजा गोबर, 200 ग्राम गुड़ और बेसन आदि लगेगा। 10 दिन तक सूबह शाम इस टंकी को किसी बांस आदि के डंडे से कम से कम 10 -10 बार 10 दिन तक चलाना होगा। 11वें दिन गाद को बैठने देना होगा। 12 वें से15 वें दिन के अंदर उस घोल से 1 लीटर निकालकर 15 लीटर स्प्रे मशीन के टंकी मे डाल कर फसलो मे स्प्रे करना है। यदि फसल न भी हो तो निर्मित घोल को पतला कर खाली खेतों मे फैला देना है, ताकि खेत की उर्वरा शक्ति, कीट रोग प्रतिरोधकता बढ़े। टंकी मे घोल बनाते समय यदि नीम का पत्ता, अकवन, समालू, खरपतवार आदि का पौधा यदि डाल देंगे तो और शक्तिशाली घोल बनेगा। इस घोल के उपयोग से फसलो मे पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति होगी। फसलो मे रोग एवं कीट व्याधि का प्रकोप कम से कम होगा।
इस कृषक गोष्ठी मे पंचायत के मुखिया, उप मुखिया, वार्ड सदस्य एवं महिला समूहों की महिलाओ, बीटीएम, एटीएम, कृषक मित्र एवं किसान सम्मिलित हुए।


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