राजकुमार भगत
रथ में सवार मदनमोहन के दर्शन करने उमड़े भक्तों जनसैलाब, खींचे रथ
पाकुड़। पाकुड़ में 1697 में राजा पृथ्वी चंद्र शाही के समय से प्रारंभ हुई रथयात्र पूरे रीति-रिवाज व भव्यता के साथ आज भी जारी है । यह रथयात्रा पिछले लगभग 326 वर्षों से चली आ रही है। 1929 में श्रद्धेय स्वर्गीय रानी ज्योतिर्मयी देवी ने पीतलआदि अष्टधातु के भव्य रथ का निर्माण करवाया । तब से आज तक राधा रानी और भगवान मदनमोहन उसी रथ पर विराजमान हो कर अपनी मौसी के घर प्रस्थान करते हैं।मंगलवार को भगवान श्री जगन्नाथ राधा मोहन को स्नान ध्यान पूजा पाठ करने के पश्चात अपने निजधाम से मौसी बाड़ी से प्रस्थान करने के लिए रथ सवार हो गए। पंडित भरत भूषण ने विधि विधान से पूजा अर्चना की। राजापाड़ा कालीतल्ला स्थानीय समिति के सहयोग से रथ पर विराजमान भगवान मदन मोहन को अपने निजधाम राजबाड़ी प्रांगण से गाजे बाजे के साथ एचडीपीओ अजीत कुमार विमल थाना प्रभारी मनोज कुमार के नेतृत्व में और चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच भव्य रथ यात्रा निकाली गई। पूरी भव्यता के साथ भजन कीर्तन एवं नृत्य किया गया। जिससे भक्तों में दुगुना उत्साहवर्धन हुआ।
“रानी ज्योतिर्मयी देवी देवोत्तर इस्टेट” के सेवायतगण श्रीमती मीरा प्रवीण सिंह, देब मोहन, अमित पांडेय, अभिजीत पांडेय और अरिजीत पांडेय के द्वारा पूजा-अर्चना की सारी व्यवस्था की । रथ राजापाड़ा, हाटपाड़ा, भगत पाड़ा मुख्य मार्ग होते हुये अपनी मौसी के घर कालीबाड़ी पहुंची जहां उन्हें पूरे आदर सत्कार के साथ रंग महल में विराजमान किया गया।अगले आठ दिनों तक रंगमहल में ही वे विश्राम करेंगे।
8 दिनों के पश्चात पुनः भगवन रथ पर सवार हो कर अपने निजधाम के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। रथ यात्रा के दौरान भक्तों द्वारा रथ खींचने की होड़ लगी रही। जगह जगह पर भक्तों ने शरबत आदि की व्यवस्था की। पानी की बौछार की गई। भक्त पान सुपारी बतासा चढ़ा भगवान के दर्शन किए। पुष्प वर्षा कर भगवान के स्वागत किया गया।







