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April 27, 2026 10:03 pm

पाकुड़ के कोल कम्पनी में इंसान की जान की कीमत जानवर से सस्ती

देख तेरी संसार की हालत क्या हो गई भगवान 17 लाख में बिक गया इंसान की जान

सतनाम सिंह

पाकुड़: पाकुड़ के चेंगाडांगा के रहने वाले एक युवक सुबीर पहाड़िया (19) सुबह लगभग 4:30 बजे अपने घर से निकलता है और बीजीआर कोल कंपनी के लोटामारा स्थित रेलवे साइडिंग में गार्ड का ड्यूटी पर जाता है। कुछ देर बाद उसके घर में एक फोन आता है कि आपके लड़के का एक्सीडेंट हो गया. सुरक्षा गार्ड सुबीर के पिता सह मुखिया विपिन सरदार दौड़ते भागते घटनास्थल पर पहुंचते हैं और अपने बच्चों की तलाश करते हैं किंतु उन्हें कहीं बच्चा नहीं मिलता है।कुछ लोग खामोश रहते हैं शायद किसी का डर सता रहा था।मामला हाई प्रोफाइल किंतु जान किसी गरीब की गई थी उसकी खून की कीमत ही क्या होती है साहब? मामला बीजीआर कंपनी का था लेहाजा एक के बाद एक पुलिस व साहब की गाड़ी पहुंचने लगी ताकि उग्र भीड़ कोई नुकसान ना करें।पुलिस निरीक्षक सह नगर थाना प्रभारी मनोज कुमार, मालपहाड़ी ओपी प्रभारी सत्येंद्र यादव, एसआई संतोष कुमार अंचलाधिकारी भागीरथ महतो अंचल निरीक्षक देवकांत सिंह,अंचल कर्मी शिवाशीष आदि दलबल और लाव लश्कर के साथ पहुंचे। किंतु भीड़भाड़ बढ़ती गई,मामला उलझता गया तुल पकड़ता गया क्योंकि जिस युवक का एक्सीडेंट बताया जा रहा था वह मिल ही नहीं रहा था? मामला की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ अजीत कुमार विमल भी वहां पहुंचे। वहां उपस्थित जन समुदाय में एक आस जगी एक पिता ने अपने पुत्र की गुहार लगाई।पत्रकार दीर्घा भी उत्सुकता वश जानने का प्रयास कर रहे थे कि आखिर जिस व्यक्ति का एक्सीडेंट बताया गया वह कहां गया? वे भी भावुक हो गए परिवार वाला का सांत्वना दे रहे थे। फिर पुनः खोजबीन शुरू हुई एक स्थान पर कोयले के ढेर के पास पिता को मोटरसाइकिल का कांच का एक टुकड़ा दिखा,आशंका ज्यादा होने पर एसडीपीओ अजीत कुमार विमल के निर्देश पर कोयले की ढेर को सरकाया गया तो अंदर से मोटरसाइकिल निकल गई फिर और थोड़ा कोयला के ढेर को सरकाया गया तो सारी तस्वीर खुल कर सामने आ गई, एक व्यक्ति अर्थात सुरक्षा गार्ड सुबीर पहाड़िया का कोयले के ढेर से शव निकला,यह देखते ही वहां पर उपस्थित ग्रामीण पत्रकार दीर्घा एवं प्रशासन के लोगों को और कुछ बताने की बात नहीं रह गई ? साफ और स्पष्ट दिख रहा था कि घटना को छुपाने का पूरी व्यवस्था कर ली गई थी और शायद कुछ देर बाद पता भी नहीं चलता। क्योंकि कोयले की ढेर में छिपाई गई शव और मोटरसाइकिल मालगाड़ी के डब्बे में डालकर ऊपर से कोयला दबा दिया जाता है। खैर यह तो एसडीपीओ साहब के प्रयास से मामला विफल हो गया।उन्होंने घटनास्थल पर ही कहा कि प्रथम दृश्य में ऐसा प्रतीत होता है कि साक्ष्य को छुपाने और ठिकाने लगाने का प्रयास किया गया है।अपराधी चाहे जो कोई भी हो उसे सजा मिलाकर रहेगी। इसकी जांच की जाएगी कि घटना है की दुर्घटना है या फिर मर्डर।अनजाने में हुआ है या जानबूझकर किया गया है। उन्होंने कंपनी को फोन लगाया पर घटनास्थल पर कोई भी नहीं पहुंचा।यहां सवाल उठता यह है कि आखिरकार सुबीर की मौत कैसे हुई? सवाल यह भी है कि
क्या वह घटना के समय जिंदा था? युवक को बेहतर उपचार कर बचाया भी जा सकता था? घटनास्थल से उसका शरीर कोयला डंप तक कैसे पहुंचा?क्या उसकी नाजुक पलों में जीवित अवस्था में उसे लोडर से कोयले के डंप में फेंका गया. क्या उसके बाद उसके ऊपर और कोयले गिरा कर ढका गया।उसके बाद फिर मोटरसाइकिल को लाया गया फिर उसे भी ढका गया।जांच हो ना हो यह अलग बात है किंतु एक बात तो तय है कि बिना हवा के पत्ता नहीं हिलता।अगर एक्सीडेंट होता तो फिर उसे छुपाने की जरूरत क्यों पड़ती ? वह भाई साहब जिनको लोडर के ऑपरेटर ने फोन किया था उन्हें तो सब पता होगा।पिता ने साफ-साफ कहा है कि यह हत्या है।सारे सबूत भी इसी और इशारे करते हैं।अब तो यह उच्च जांच में ही पता चलेगा की हत्या या एक्सीडेंट.इस बेहद ही जघन्य अपराध में किस-किस के चेहरे संलिप्त है.इसका मास्टरमाइंड कौन है? आखिर ऐसी कौन सी बात थी कि जिसके वजह से यह घटना हुई?यह सब भविष्य के गर्त में है। चाहे न्याय मिले न मिले आज उसके साथ हुआ है कल किसी और के साथ होगा।अगर यह अपराध है तो अपराधी को सजा मिलनी ही चाहिए।मुआवजा तो कंपनी देती ही है पर मुआवजे के साथ-साथ अपराधी की भी धर पकड़ होनी चाहिए।बैठक में तय हुआ कि परिवार वालों को 17 लाख रुपया मुआवजा के तौर पर दिया जाएगा। इसके लिए एक शिष्ठ मंडल की बैठक की गई।जिसमें एसडीपीओ अजीत कुमार विमल कंपनी के वाइस चेयरमैन झामुमो के जिला अध्यक्ष कांग्रेस विधायक प्रतिनिधि भाजपा नेता सीओ, सीआई,नगर थाना प्रभारी हीरानंदपुर मुखिया परिवार के सदस्य आदि की उपस्थिति सर्वसम्मति से तय किया गया कि संयुक्त खाते में एक सप्ताह के अंदर 17 लाख रुपए की राशि संयुक्त खाते में दी जाएगी।इसके अलावा उसकी बाइक भी दिया जाएगा।यह ना सोचे कि हम बच गए हैं यह तो जग जाहिर है जैसी करनी वैसी भरनी।हाथ कंगन को आरसी क्या? एक गरीब की जान की मुआबजा 17 लाख रुपया।कितना अजीब है ना कि जो ज्यादा टाई टाई करेगा जेल जाएगा। कोयला उठेगा जेल जाएगा?और जान जाएगा तो मुआवजा दिया जाएगा। लाचारी है कुछ कर नहीं सकते। सब गोलमाल है भाई।

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