तीन पुलिसकर्मी घायल, भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने किया बल प्रयोग
✍️ रिपोर्ट : अमित चौधरी
साहिबगंज, 30 जून 2025:
1855 की ऐतिहासिक हूल क्रांति की धरती भोगनाडीह एक बार फिर संघर्ष का गवाह बन गई। हूल दिवस से ठीक पहले सोमवार को यहां भारी बवाल हुआ, जिसमें आदिवासी ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प, तीर और पत्थरबाजी तक की नौबत आ गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
ताला टूटने से भड़के आदिवासी, पुलिस पर तीर-पत्थर से हमला
जानकारी के अनुसार, भोगनाडीह स्थित सिदो-कान्हू पार्क का ताला सोमवार सुबह अचानक खोल दिया गया, जिससे सिदो-कान्हू हूल फाउंडेशन और आदिवासी समुदाय के लोग आक्रोशित हो उठे।
गुस्साए लोगों ने पुलिस पर तीर और पत्थर से हमला कर दिया, जिसमें तीन पुलिस जवान घायल हो गए। स्थिति को बेकाबू होते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को तितर-बितर किया।
घायल जवानों को बरहेट सीएचसी में भर्ती कराया गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
ताला खुलते ही लोग पहुंचे प्रतिमा स्थल, की श्रद्धांजलि
घटना के बाद जब ताला खुला तो ग्रामीण सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे। स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी सतर्कता बरते हुए है।
मौके पर डीसी हेमंत सती, एसपी अमित कुमार सिंह और अन्य वरीय अधिकारी मौजूद हैं।

पूर्व से चल रहा था तनाव, 13 कार्यकर्ता हिरासत में
इससे पहले शनिवार रात को फाउंडेशन के 13 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने टेंट निर्माण के दौरान हिरासत में लिया था, जिससे ग्रामीणों में रोष था। इसके विरोध में रविवार को मंडल मुर्मू (जो सिदो-कान्हू के वंशज हैं) के नेतृत्व में आदिवासियों ने स्मारक स्थल पर ताला जड़ दिया और पारंपरिक हथियारों के साथ प्रदर्शन किया।
चंपाई सोरेन बोले – “शहीदों की धरती पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण”
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने घटना पर दुख जताते हुए कहा:
“हूल दिवस के दिन इस प्रकार का संघर्ष बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शहीदों को श्रद्धांजलि देने की जगह हम आपसी टकराव में उलझ गए हैं। यह शहीदों का अपमान है।”
बाबूलाल मरांडी ने प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे प्रशासन की “हठधर्मिता” बताया। गिरिडीह में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“परंपरा के अनुसार पहले गांव और परिवार के लोग पूजा करते हैं, फिर आगे कार्यक्रम होता है। प्रशासन ने यह नहीं माना और टकराव की स्थिति बनी।”
उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में स्मारक स्थल के 2–3 किमी दायरे में कोई राजनीतिक या सरकारी आयोजन न हो।
सीता सोरेन ने प्रशासन पर बरसते हुए मांगी कार्रवाई
भाजपा नेत्री सीता सोरेन घटनास्थल पर पहुंचीं और अधिकारियों पर जमकर बरसीं। उन्होंने कहा कि
“लाठीचार्ज करना आदिवासियों का अपमान है। शहीदों के नाम पर पुलिस की बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
मंत्री दीपिका पांडे सिंह का आरोप – “यह भाजपा की साजिश”
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि यह सब भाजपा का पूर्व नियोजित षड्यंत्र है।
“हूल दिवस की भावना को तोड़ने की साजिश हो रही है। भाजपा के कई नेता पिछले हफ्ते से संथाल परगना में सक्रिय थे, संदेह स्पष्ट है।”

प्रशासन ने फाउंडेशन को अनुमति नहीं दी थी
गौरतलब है कि सिदो-कान्हू हूल फाउंडेशन और आतु मांझी बैसी ने 30 जून को भोगनाडीह में कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी, पर मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने इसे मंजूरी नहीं दी।
इसके बावजूद संगठन ने टेंट-पंडाल बनवाया और कार्यक्रम करने की जिद पर अड़ा रहा, जिससे टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई।
लोबिन हेंब्रम का आरोप – सरकार ने पूजा रोकी, टेंट हटवाया, तभी भड़का बवाल
पूर्व विधायक लोबिन हेंब्रम ने भोगनाडीह की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि
“गांव वाले और सिदो-कान्हू के वंशज पहले पूजा करना चाहते थे, फिर मांझी-परगना की ओर से कार्यक्रम तय था। लेकिन प्रशासन ने पूजा से रोका और टेंट उखाड़ फेंका। इसके बाद ही बवाल हुआ। पुलिस ने जानबूझकर हंगामा शुरू कराया।”
लोबिन ने इसे आदिवासी परंपरा और अधिकारों का अपमान बताते हुए कहा कि सरकार आदिवासियों की भावना कुचल रही है।
डीआईजी अंबर लकड़ा ने लिया हालात का जायजा
संथाल परगना के उप महानिरीक्षक (DIG) अंबर लकड़ा भी भोगनाडीह पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की स्थलीय समीक्षा की। उन्होंने वरीय अधिकारियों के साथ बैठक की और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
पुलिस-प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।








