पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह निषेध और बाल संरक्षण पर हुआ मंथन; 98 लाख मुआवजा राशि सहित करोड़ों की योजनाओं का लाभ वितरण
पाकुड़। बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों को लेकर गुरुवार को पाकुड़ में एक बड़ा विधिक जागरूकता एवं सशक्तिकरण शिविर आयोजित किया गया। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था — “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य”। कार्यक्रम में न्यायपालिका, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग एक मंच पर नजर आए और बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति संजय प्रसाद, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे, उपायुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। शिविर में बाल संरक्षण, पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह निषेध, बाल अधिकार एवं निःशुल्क विधिक सहायता जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे ने कहा कि पाकुड़ जैसे जिले में माननीय न्यायमूर्ति का आगमन गौरव की बात है। उन्होंने न्यायपालिका और प्रशासन के बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि “बार और बेंच एक ही रथ के दो पहिए हैं।” कार्यक्रम के दौरान अवर निरीक्षक विकण कुमार ने पॉक्सो एक्ट की जानकारी देते हुए कहा कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है और इसमें लड़के एवं लड़कियां दोनों समान रूप से संरक्षित हैं। उन्होंने लोगों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहने की अपील की। नव नियुक्त चौकीदारों की टीम ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह, मानव तस्करी और बाल शोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रभावी प्रस्तुति दी, जिसे लोगों ने खूब सराहा। फैमिली जज रजनीकांत पाठक ने कहा कि सुरक्षित बचपन केवल एक विषय नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहानी के माध्यम से बाल तस्करी और यौन शोषण जैसे अपराधों के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाया। उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, पोषण और शिक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि जिले में 1285 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लगभग 91 हजार बच्चों को पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा दी जा रही है। वहीं मिशन वात्सल्य, स्पॉन्सरशिप स्कीम और फोस्टर केयर जैसी योजनाओं के जरिए जरूरतमंद बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। माननीय न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने कहा कि ऐसे विधिक जागरूकता शिविर समाज को बच्चों और महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बाल विवाह, मानव तस्करी और बाल शोषण जैसे अपराधों के खिलाफ सामूहिक जागरूकता की जरूरत बताई। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण भी किया गया। वहीं कई योजनाओं के तहत लाभुकों के बीच स्वीकृति पत्र, जॉब कार्ड, योगा किट, पेंशन स्वीकृति एवं अन्य परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। जेएसएलपीएस के तहत 75 स्वयं सहायता समूहों को 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की क्रेडिट लिंकेज राशि दी गई। इसके अलावा मोटर दुर्घटना दावा वादों से जुड़े 7 मामलों में लाभुकों के बीच 98 लाख 18 हजार रुपये की मुआवजा राशि का चेक भी वितरित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डीएलएसए सचिव रूपा वंदना कीरो ने किया, जबकि समापन पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।










