बंदियों को मिल रही सुविधाओं एवं स्वास्थ्य व्यवस्था का लिया जायजा
झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने शुक्रवार को जिला कारागार, पाकुड़ का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कारागार परिसर के विभिन्न वार्डों, बैरकों, अस्पताल, किचन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का अवलोकन किया तथा बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के क्रम में माननीय न्यायमूर्ति ने जेल के किचन में तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं बंदियों को दिए जाने वाले आहार की व्यवस्था का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने जेल अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सीय सुविधाओं, दवाओं एवं उपचार व्यवस्था की भी जानकारी ली। उन्होंने कारा प्रशासन से बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही शिक्षा, पेयजल, दूरभाष एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक चर्चा की।
महिला बंदियों से किया संवाद, समस्याओं को गंभीरता से सुना
माननीय न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने महिला बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को गंभीरतापूर्वक सुना। उन्होंने बंदियों को आश्वस्त किया कि उनकी जायज मांगों एवं समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक पहल की जाएगी।
महिला बंदियों के बच्चों के बीच फुटबॉल एवं किड्स वियर का किया वितरण
माननीय न्यायमूर्ति ने महिला बंदियों के बच्चों के बीच फुटबॉल एवं किड्स वियर का वितरण किया। इस अवसर पर बच्चों एवं महिलाओं के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित एवं खुशहाल होना चाहिए तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए संवेदनशील होकर कार्य करने की आवश्यकता है।
मुलाकाती केंद्र में लीगल एड हेल्प डेस्क का हुआ उद्घाटन
इसके अलावा जिला कारागार, पाकुड़ के “मुलाकाती केंद्र” में स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति संजय प्रसाद, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे एवं उपायुक्त मेघा भारद्वाज द्वारा फीता काटकर एवं नारियल फोड़कर विधिवत रूप से किया गया।
जेल परिसर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने पर दिया गया जोर
निरीक्षण के दौरान माननीय न्यायमूर्ति ने कारागार प्रशासन को बंदियों की मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवा एवं सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार एवं पुनर्वास का केंद्र भी होना चाहिए। उन्होंने बंदियों के पुनर्वास, शिक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया तथा संबंधित अधिकारियों को संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे, उपायुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा, जेल अधीक्षक, जेलर दिलीप कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।








