अति अहंकार ले डूबी भाजपा को,पार्टी के अंदर ही कई मतभेद।
राजकुमार भगत
पाकुड़। भारतीय जनता पार्टी आज देश की दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है,भाजपा का एक अलग ही मान सम्मान है लेकिन भाजपा में बढ़ते कुनबे ही भाजपा के लिया भस्माशुर बने हुए है,बात पाकुड भाजपा की जहां मनभेद के साथ मतभेद भी चल रहा पार्टी के अंदर जिसका असर जमीनी स्तर पर पर इनकी पकड़ ढीली होते जा है। ऊपर से खींच तान में सभी आगे हैं,सीधा कहिए महारत हासिल है। हारने के बाद यह पाकुड़ की जनता की प्रतिक्रिया है। यहां की दुःखी जनता की नाराजगी साफ-साफ देखी जा सकती है। कुछ मोहल्ले की जनता ने कहा कई पटिया मिलने जुलने का काम किया ।किंतु बीजेपी के कार्यकर्ता कभी उनके मोहल्ले नहीं आई। इससे भी कुछ जनता दुखी थी।परिश्रम का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता। फिर ऐसी कौन सी बात हुई की जीत दर्ज करते-करते हार हो गई। वह भी बिल्कुल बुरी तरीके से। जबकि ईनके पास भी कई सहयोगी दल थे। सहयोगी दल पहले ही आरोप लगा चुकी हैं कि उन्हें पूछा नहीं जाता फिर भी काम कर रहे हैं। फिर सहयोगी दलों ने कितना साथ दिया होगा यह भी यह भी समीक्षा करनी होगी। यह भी समीक्षा करनी होगी की सहयोगी दलों के साथ भारतीय जनता पार्टी ने कितनी बार बैठके की। उन्हें क्या जिम्मेदारी दी गई। जनता ने यह भी आरोप लगाया की कही ओवर कॉन्फिडेंस तो नहीं? खैर जनता जो भी कहे इसकी समीक्षा तो होगी। और यह भी चर्चा होगी हमें तो अपनों ने डुबोया गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूब गई जहां भरोसा मुझे ज्यादा था। कई अन्य खामया भी थी। समीक्षा के क्रम में यह भी जांच करना आवश्यक होगा किसने दिया साथ और किसने किया भीतरी अघात। एक बात स्पष्ट है की भाजपा को जीतने के इस वर्ष कई कारण थे। शुरू से ही अंदाजा लगाया जा रहा था भाजपा को कटने छटने और बटने का पूरा लाभ यहां मिलेगा। जातीय समीकरण सबको पता था। पूरी आश लगाई गई थी इस बार भाजपा की जीत सुरक्षित है। और अभी नहीं तो कभी नहीं। अब तो अभी वाली बात हुई नहीं और कभी वाली बात भविष्य की है।





