मोनक-दुलाल-रिक्की-एकलाख,सलीम,मोना का सिंडिकेट बना प्रशासन के लिए चुनौती।
छपाई से लेकर बिक्री तक पूरे नेटवर्क पर माफियाओं का कब्जा, जिम्मेदार की चुप्पी पर उठे सवाल,सूत्र।
पाकुड़ जिले में अवैध एटीएम लॉटरी टिकट का धंधा इन दिनों बेलगाम हो गया है। सूत्रों से प्राप्त खबर के अनुसार नगर थाना क्षेत्र के हरिनडांगा और मारवाड़ी मोहल्ले में मोनक, दुलाल, रिक्की और एकलाख नामक युवकों का पूरा सिंडिकेट इस फर्जी कारोबार को खुलेआम चला रहा है। इनकी छपाई से लेकर बिक्री तक की पूरी व्यवस्था स्थानीय स्तर पर सक्रिय है, लेकिन हैरानी की बात है कि प्रशासन पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है। सूत्रों की मानें तो इन दिनों ‘चॉइस नंबर’ नामक एक खास किस्म की लॉटरी खूब चल रही है, जिसमें ग्राहक अपनी मनचाही संख्या पर दांव लगाते हैं और मोटे इनाम की उम्मीद करते हैं। ये टिकटें बिना किसी सरकारी अनुमति के छापी जा रही हैं, जिन पर कोई वैध रजिस्ट्रेशन नंबर या कानूनी स्वीकृति नहीं होती। इन फर्जी टिकटों की छपाई मारवाड़ी मोहल्ले के अंदर ही हो रही है और इन्हें शहर के विभिन्न मोहल्लों, चौक-चौराहों व भीड़भाड़ वाले इलाकों में एजेंटों के जरिए बेचा जा रहा है। हर दिन लाखों रुपये का अवैध लेन-देन हो रहा है, जिसमें जिले भर से युवा, बेरोजगार, दिहाड़ी मज़दूर तक जुड़ते जा रहे हैं।
कम दाम, बड़ा लालच… फिर बर्बादी की राह
सिर्फ 10-20 रुपये के टिकट पर हजारों जीतने का लालच दिखाकर गरीबों को फंसाया जा रहा है। नतीजा – कई परिवार कर्ज में डूब चुके हैं, लेकिन सिस्टम पर कोई असर नहीं।
प्रशासन मौन, माफिया बेलगाम
पूरे कारोबार के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो टिकट छापने से लेकर नंबर निकालने और इनाम तय करने तक सब कुछ खुद तय करता है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में यह काला धंधा फल-फूल रहा है? क्या प्रशासन की चुप्पी मिलीभगत का संकेत है?





