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June 15, 2026 3:05 pm

पचवाड़ा कोल ब्लॉक के विस्थापितों का फूटा गुस्सा, कहा— ‘हमारे नाम पर अपनी रोजी-रोटी सेकना बंद करें बाहरी लोग’

बाहरी तत्वों द्वारा विस्थापित ग्रामीणों को गुमराह करने का आरोप

‘ग्राम सुरक्षा विस्थापित कार्य समिति’ ने बैठक कर जताई नाराजगी

पाकुड़: पचवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम आलूबेडा, पचवाड़ा और आसपास के विस्थापित ग्रामीणों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बुधवार को अमरापाड़ा प्रखंड अंतर्गत आलूबेडा सीनियर फुटबॉल मैदान के समीप आम पेड़ के नीचे ‘ग्राम सुरक्षा विस्थापित कार्य समिति’ तथा ‘अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सेंट्रल कोल माइंस डीबीएल और नॉर्थ कोल माइंस बीजीआर से जुड़े विभिन्न मुद्दों और विस्थापितों की समस्याओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बाहरी लोगों पर शोषण और गुमराह करने का आरोप

बैठक के दौरान समिति के सदस्य माहातन टूडू ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक सप्ताह से समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से यह जानकारी मिल रही है कि पाकुड़ जिला कार्यालय के बाहर में धरना जैसे बैठकें आयोजित कर कुछ बाहरी तत्वों द्वारा यहां के सीधे-साधे और भोले-भले ग्रामीणों का दुरुपयोग किया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग विस्थापितों के नाम पर अपनी ‘रोजी-रोटी सेकने’ और निजी स्वार्थ साधने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे मूल विस्थापित ग्रामीण दिग्भ्रमित हो रहे हैं।अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति सदस्य ने बताया कि हम अपने हक और अधिकारों के लिए खुद सक्षम हैं। बाहरी लोगों को हमारे मामलों में हस्तक्षेप कर विस्थापितों का शोषण करने और उन्हें गुमराह करने की कतई इजाजत नहीं दी जाएगी।”

ग्रामीणों ने की जमकर नारेबाजी, लगाए गंभीर आरोप

बैठक के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित विस्थापित ग्रामीणों और समिति के सदस्यों ने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कुछ विशिष्ट नामों (जैसे मुनी हांसदा, संगम मेना और वकील डीके सिंह) के खिलाफ तीखी नारेबाजी की और उन पर विस्थापितों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों नारे बुलंद किए कि
बाहरी व्यक्तियों का शोषण नहीं चलेगा, नहीं चलेगा!,विस्थापितों के साथ धोखा करना बंद करो!,मनमानी और तानाशाही वापस जाओ! के नारे लगाए गए।समिति के पदाधिकारियों ने सभी विस्थापित ग्रामीणों से एकजुट रहने और किसी भी प्रकार के बाहरी बहकावे में न आने की अपील की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ या उनके नाम पर राजनीति बंद नहीं हुई, तो वे अपने हक की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।

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