पाकुड़। जिले भर में डीएमएफटी फंड से लाखों रुपये खर्च कर बनाई गईं पेयजल टंकियां अब काम के नहीं रहीं। समाहरणालय, बस स्टैंड समेत कई प्रमुख स्थानों पर लगी ये टंकियां न सिर्फ खराब पड़ी हैं, बल्कि जनता की उम्मीदों पर भी पानी फेर रही हैं। समाहरणालय परिसर में हर दिन सैकड़ों लोग अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचते हैं। भीड़भाड़ के बीच अगर किसी को प्यास लगे तो परिसर में लगी पेयजल टंकी की ओर रुख करता है, मगर वहां पानी नहीं मिलता। लोग प्यासे लौटने को मजबूर हैं। यही हाल मजदूरों का भी है। निर्माण स्थलों या शहर के मुख्य बिंदुओं पर काम करने वाले मजदूर जब टंकी से पानी लेने पहुंचते हैं, तो उन्हें सिर्फ बूंद-बूंद पानी टपकता नजर आता है। डीएमएफटी फंड का मकसद खनन प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करना है, लेकिन धरातल पर स्थिति उलट है। करोड़ों की लागत से बनी ये टंकियां अब सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गई हैं।





