राजकुमार भगत
पाकुड़। बसंत पंचमी सरस्वती पूजा को लेकर जिले भर में उत्साह का माहौल है। विद्या की देवी विद्या वाहिनी मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। जिले भर के लगभग विद्यालय, संस्थान, मोहल्ले आदि में सरस्वती पूजा धूमधाम के साथ मनाया जाता है। जिसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। मूर्तिकार जतन पाल, रतन पाल एवं जीत पाल ने बताया कि सभी ने लगभग 50 से 80 प्रति मूर्ति सरस्वती देवी की प्रतिमा बनाई है । लगभग प्रतिमाएं पूर्व से ही बुक है। लोग अपनी-अपनी प्रतिमाएं ले जा रहे हैं । किंतु यदि एक अद प्रतिमा बच जाता है तो उसकी पूजा देनी होती है। सभी ने आकर्षक ढंग से मां सरस्वती की प्रतिमा स्थानीय रथ मेला मैदान में बनाई है। देवी मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी को पीले वस्त्र पहनकर धूप दीप पुष्प बेलपत्र नैवेद्य अच्छत चावल, चंदन रोड़ी, गंगाजल ,कुमकुम, आदि से पूजन करते हैं। मां सरस्वती को पीले रंग बहुत अधिक पसंद है। जिला मुख्यालय स्थित सभी निजी शिक्षण संस्थान, कल्बो आदि पूजा अर्चना की जाएगी। जिला मुख्यालय स्थित रथ मेला मैदान में नगर की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है।







