बजरंग पंडित
पाकुड़िया प्रखंड भर में सरस्वती पूजनोत्सव की तैयारी में जोरों पर है। प्रखंड के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, छात्रावासों तथा गली-मोहल्लों में छात्र छात्राओं द्वारा मां सरस्वती की पूजा की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए मूर्ति स्थापित करने की जगह का चयन कर साफ-सुथरा करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। पूजा स्थलों पर पंडाल लगाने की तैयारी भी हो रही है। वहीं, मूर्तिकारों द्वारा मां सरस्वती की मूर्तियों को लगभग दो माह पहले से ही निर्माण किया जा रहा है। जिसे वे अब अंतिम रूप देने में जुटे हैं। प्रखंड के मोंगला बांध, गनपुरा,राधानगर, तालवा, सिद्धू कान्हु चौक, प्रखंड मुख्यालय चौक सहित कई जगहों पर मूर्तिकारों द्वारा मूर्तियां बनाई जा रही है।कुछ मूर्तियां ऑर्डर के आधार पर तैयार की गई है। ये मूर्तियां एक हजार से लेकर दस हजार तक के रेंज में उपलब्ध है मोंगला बांध महावीर चौक के नजदीक में मूर्ती बना रहे मोंगला बांध निवासी मूर्तीकार रोहित पाल ने बताया कि प्रतिमा बनाने का कार्य उनलोगों की पुरानी परम्परा है। पहले बड़े-बुजुर्ग बनाते थे वह अपने स्वर्गीय पिता आनंदपाल से मूर्ति व पेंटिंग बनाना सीखे हैं।अब वे लोग खुद बनाने का काम करते हैं। एक प्रतिमा को अंतिम रूप देने में दो दिन का समय लगता है। सबसे अधिक डिमांड मिडियम साइज के प्रतिमा की होती है। जिस कारण वे लोग ऑर्डर व बिना ऑर्डर के भी बनाते हैं। कई तरह की प्रतिमा बना कर रख देते हैं, लोग अपने पसंद की प्रतिमा लेते हैं। हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत और कला की देवी का परम स्थान प्राप्त है। इस दिन माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मां सरस्वती का अवतरण सृष्टि के सृजनकर्ता ब्रह्माजी ने किया था। इसे वसंत पंचमी के नाम से भी जानते हैं। वसंत पंचमी के दिन समर्पित भाव से मां सरस्वती पूजा-पाठ से पूजनकर्ता को कला और ज्ञान के क्षेत्र में सफल होने का आशीष मिलता है। मनुष्य में ज्ञान का संचार और वाणी में मधुरता आती है।





