बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग, योजनाओं के चयन और सरकारी राशि के इस्तेमाल पर उठे सवाल; नगर परिषद अध्यक्ष से जांच की मांग।
पाकुड़ नगर परिषद क्षेत्र में विकास योजनाओं की प्राथमिकता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। शहर के कई आबादी वाले मोहल्ले आज भी सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कहीं जर्जर रास्तों से लोगों का आवागमन मुश्किल है तो कहीं जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से बरसात में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। लेकिन नगर परिषद की योजनाओं को देखकर विकास की प्राथमिकताओं पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन मोहल्लों में बड़ी आबादी वर्षों से सड़क और नाली की मांग कर रही है, वहां योजनाएं धरातल पर नहीं उतर रही हैं। इसके विपरीत खाली जमीन पर सड़क और नाली का निर्माण कराया जा रहा है, जहां फिलहाल न तो मकान हैं और न ही आम लोगों की आवाजाही। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर योजनाओं का चयन किस आधार पर किया जा रहा है और इन निर्माण कार्यों से तत्काल कितने लोगों को लाभ मिलने वाला है? मामला सिर्फ योजना चयन तक सीमित नहीं है। कुछ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। लोगों की मांग है कि निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए और यह भी स्पष्ट किया जाए कि योजनाओं का चयन किन मानकों और जनहित की जरूरतों के आधार पर किया गया है।
स्थानीय लोगों ने नगर परिषद अध्यक्ष शबरी पाल एवं उपाध्यक्ष से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पहले उन मोहल्लों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जहां सड़क और नाली के अभाव में आम नागरिक रोजाना परेशानियों का सामना कर रहे हैं। साथ ही, विवादित योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराकर प्राक्कलन और निर्माण गुणवत्ता की पड़ताल होनी चाहिए। जनता के टैक्स की राशि से होने वाला विकास जनता की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। यदि आबादी वाले मोहल्ले बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते रहें और खाली जमीन पर निर्माण को प्राथमिकता मिले, तो योजना निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।






