रांची। ओमान के मस्कट में फंसी सिमडेगा की प्रवासी श्रमिक प्रीति कुजूर आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट रही हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास, मस्कट के सहयोग से उनकी वापसी सुनिश्चित कराई। प्रीति 1 अगस्त को भारत के लिए रवाना हो चुकी हैं और 2 अगस्त को झारखंड पहुंचेंगी। प्रीति के भाई रंतु कुजूर ने 19 जून को मदद की गुहार लगाई थी। आरोप है कि मार्च में एक एजेंट ने दुबई में 45 से 50 हजार रुपए मासिक कमाई का झांसा देकर उन्हें विदेश भेजा, लेकिन उन्हें ओमान भेज दिया गया। वहां उन्हें महज 23 से 25 हजार रुपए में काम करना पड़ा। वापस भारत आने की इच्छा जताने पर कंपनी मालिक ने बड़ी रकम की मांग की। परिवार से 1.92 लाख रुपए लेने के बाद भी उन्हें वापस नहीं भेजा गया।
मामला सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद 23 जून को राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने मामला प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स, रांची और भारतीय दूतावास, मस्कट को भेजा। 24 जून को दूतावास ने प्रीति से संपर्क किया। कंपनी मालिक ने दो साल का अनुबंध पूरा होने से पहले भारत लौटने के लिए 950 ओमानी रियाल मांगे थे। नियंत्रण कक्ष की पहल पर दूतावास ने बातचीत की, जिसके बाद रकम घटाकर 600 ओमानी रियाल कर दी गई। राशि जमा होने के बाद प्रीति का पासपोर्ट और अन्य मूल दस्तावेज भी वापस कर दिए गए। राज्य सरकार ने कहा है कि विदेश या देश के किसी भी हिस्से में काम कर रहे झारखंड के प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। संकट की स्थिति में मदद के लिए राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष लगातार काम कर रहा है।






