तुपकाडीह(बोकारो)। पुरनाटांड़ नहर किनारे स्थित मां सरस्वती विद्या मंदिर में सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक कामदेव महतो ने सावित्रीबाई फुले के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए नारी शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की चर्चा की। श्री महतो ने कहा कि एक कुशल समाज के लिए नारी शिक्षा की परम आवश्यकता है। सावित्रीबाई फुले ने ब्रिटिश काल के दौरान ही इसकी पहचान का ली थी उन्होंने कहा था कि अगर लड़कियां शिक्षित होगी तभी समाज शिक्षित होगा और एक समाज तभी शिक्षित कहा जाएगा जब वहां लड़कियों एवं महिलाओं को भी शिक्षा ग्रहण करने की पूर्ण आजादी होगी। विद्यालय के प्राचार्य बीके सिंह ने कहा कि ब्रिटिश काल के दौरान सावित्रीबाई फुले ने सती प्रथा, बाल विवाह जैसे विभिन्न सामाजिक कुरीतियों का खंडन करते हुए उनका विरोध किया था। इस अवसर पर स्थानीय मुखिया शांति देवी ने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चियों आज आपको शिक्षा में बराबर का अधिकार मिला हुआ है किंतु एक समय था जब बालिकाओं को घर एवं प्रदा प्रथा में ही रखा जाता था उन्हें शिक्षा का अधिकार नहीं था किंतु आज आपको मिला है। अतः आप सभी अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाते हुए शिक्षा ग्रहण कर अपना एवं अपनी माता-पिता का नाम रोशन करें और समाज में एक नई नव चेतना का निर्माण करते हुए लोकतंत्र के सबसे बड़े पद तक पहुंचाने का प्रयास करें। इस दौरान विद्यालय के दर्जनों शिक्षक- शिक्षिकाओं सहित सैकड़ो की संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।








