तुपकाडीह से अक्षय कुमार सिंह की रिपोर्ट।
तुपकाडीह(बोकारो)। बुधवार को विस्थापित विकास पब्लिक स्कूल शिबूटांड में भारत की पहली महिला शिक्षिका के नाम से जाने जाने वाली सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक अर्जुन महतो ने कहा कि ब्रिटिश काल के दौरान महिलाओं की शिक्षा में सबसे बड़ा योगदान सावित्रीबाई फुले का रहा। सावित्रीबाई फुले ने बाल विवाह, सती प्रथा, विधवा प्रताड़ना, लिंग भेद आदि 19वीं सदी में फैली सामाजिक कुरीतियों के निराकरण में अपना अहम योगदान दिया। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक नंद गोपाल गोस्वामी ने सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय बताते हुए कहा कि-
” नारी कभी हारती नहीं उसे हराया जाता है,
लोग क्या कहेंगे कहकर के उसे डराया जाता है। “
वहीं समाजशास्त्र शिक्षक हेमंत कुमार महतो ने नारी मे निहित देवीय चारित्रिक एवं व्यवहारिक गुणो को बच्चों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि नारी में अद्भुत धैर्य, सहनशीलता, त्याग की भावना, समर्पित भाव आदि होते है। लोग क्या कहेंगे? अगर यह सावित्रीबाई फुले सोची होती तो शायद आज विद्यालयों में बच्चे सिर्फ गुड मॉर्निंग सर ही कह रहे होते ,गुड मॉर्निंग मेम के लिए कोई शिक्षिका नहीं होती। इस दौरान कार्यक्रम में विद्यालय के दर्जनों शिक्षक एवं शिक्षिकाएं जिनमें उत्तम कुमार सिंह, प्रदीप कुमार महतो, रविंद्र बाबू, गौरी देवी, रेशमी कुमारी, संगीता कुमारी, पूजा कुमारी,डोली कुमारी सहित सैकड़ो विद्यार्थी मौजूद रहे।





