दो महीने की प्री-काउंसलिंग के बाद लोक अदालत में 18,864 मामलों का निपटारा।
पाकुड़ व्यवहार न्यायालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष झालसा, ने इसका वर्चुअल उद्घाटन किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष दिवाकर पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित लोक अदालत में न्यायिक पदाधिकारी व संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले 12 जुलाई से 12 सितंबर तक चली प्री-काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से भी पक्षकारों के बीच आपसी सहमति और सुलह-समझौते का प्रयास किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के तहत कुल 18,864 मामलों का निष्पादन किया गया। मामलों के निपटारे के दौरान 5 करोड़ 85 लाख 56 हजार 476 रुपए का समझौता कराया गया।
लोक अदालत के लिए कुल आठ बेंचों का गठन किया गया था। इनमें सुलहनीय आपराधिक मामले, दीवानी मामले, बैंक ऋण, पारिवारिक विवाद, बिजली समेत विभिन्न प्रकार के मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निपटारा किया गया। लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को कम समय और कम खर्च में त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के साथ अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना रहा। इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्जवल बेक, प्रभारी न्यायाधीश विजय कुमार दास सहित पैनल अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के अधिवक्ता, मध्यस्थ, स्थायी लोक अदालत के सदस्य, बैंक अधिकारी, न्यायालय कर्मी, संबंधित विभागों के अधिकारी, पैरा लीगल वॉलंटियर तथा वादी-प्रतिवादी मौजूद रहे।








