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July 23, 2026 7:32 pm

काजी नजरुल इस्लाम की 127वीं जयंती पर गूंजे क्रांति और साहित्य के सुर

पाकुड़: जिले के सिद्धो-कान्हू मुर्मू पार्क में मंगलवार को बंगाली समाज की ओर से महान विद्रोही कवि, संगीतकार और क्रांतिकारी काजी नजरुल इस्लाम की 127वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान उनके रचित कालजयी गीतों का सामूहिक गायन किया गया तथा उनकी प्रसिद्ध कविताओं का पाठ कर उनके साहित्यिक योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने काजी नजरुल इस्लाम के जीवन, संघर्ष और उनकी क्रांतिकारी रचनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि वे बांग्ला साहित्य के ऐसे सशक्त हस्ताक्षर थे, जिन्होंने अपनी लेखनी को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उनके विचारों और रचनाओं ने उस समय न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी, बल्कि समाज में जागरूकता और प्रतिरोध की भावना भी मजबूत की। वक्ताओं ने यह भी कहा कि अपने जीवनकाल में उन्होंने हजारों गीतों की रचना की, जिन्हें आज “नजरुल गीति” के नाम से जाना जाता है। उनकी रचनाएं आज भी सामाजिक एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और शोषित-वंचित वर्ग की आवाज को मजबूती देती हैं।
कार्यक्रम के दौरान बंगाली समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें निरंजन घोष, मुकुल भट्टाचार्य, जगन्नाथ मंडल, निमाई दास, माणिक देव, नारायण घोष, हलधर शील, बेला मजुमदार, पंचानन सरकार, सोमनाथ दास और खोकन साधु सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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