सरकार कोई भी आए लेकिन पाकुड जिले वासियों को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं
सुदीप कुमार त्रिवेदी
एक तरफ तो सूर्यदेव के प्रचंड ताप से लोग हलकान और परेशान हो रहे है, तो वहीं दूसरी ओर पाकुड़वासी के माथे पर गर्मी के शुरू होते ही शुरू हो चुकी बिजली की आँख मिचौली से बल पड़ने शुरू हो गए हैं । पाकुड शहरी क्षेत्र के साथ साथ ग्रामीण इलाकों के लोग भी कमोबेश ऐसी ही समस्या से रू ब रू होने को बाध्य होते प्रतीत हो रहे हैं । गर्मी से व्याकुल लोग जब राहत पाने की आश में घर की ओर कदम बढ़ाते हैं तो उनकी यही चिंता रहती है कि घर जाने पर बिजली की उपलब्धता नसीब होगी कि नहीं। पाकुड शहरी क्षेत्र की बात करें तो यहाँ गर्मियों की शुरुआत के साथ बिजली आने जाने का खेल शुरू हो गया है । बिजली की इस परंपरागत आँख मिचौली को लेकर लोग कभी विभागीय कार्यशैली को कोस रहे हैं तो कभी जनप्रतिनिधि को, क्योंकि हर चुनाव से पूर्व दलों के उम्मीदवार जनता से क्षेत्र के सम्पूर्ण विकास का वादा करते है जिसमें बिजली भी आती है, परंतु चुनाव परिणामों के बाद जनता के लिए समस्या वैसी की वैसी ही रह जाती है । बताते चले कि कुछ दिनो पहले पाकुड़ विधानसभा के विधायक व राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने ईलाके में 24 घंटे में 22 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने की बात कही थी लेकिन लोग संभवतः शेष दो घंटे के सार को ही समझने का प्रयास करती नजर आती है । बिजली समस्या के बाबत बिजली विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि ग्रिड से अलग अलग समय पर अलग अलग मात्रा की बिजली उपलब्ध हो रही है जिसके आधार पर बिजली वितरण किया जाता है, हालांकि पदाधिकारी ने साफगोई से यह कहा कि दिन के बनिस्पत रात्रि में बिजली आपूर्ति की कुछ समस्या जरूर है, जिसे दूर करने की कोशिश की जा रही है । दूसरी ओर विभागीय सूत्रों का कहना है कि ग्रिड से जितनी मात्रा में बिजली मिलनी चाहिए उतनी उपलब्ध नही हो पाती है जिसके कारण लोडशेडिंग की समस्या बार बार आती है ।





