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May 11, 2026 4:56 am

बालू का अवैध उत्खनन से बांसलोई नदी का अस्तित्व खतरे में।

बालू का अवैध उत्खनन होने से बांसलोई नदी खाई में तब्दील होने के कगार पे।

बजरंग पंडित पाकुड़।

पाकुड/ जिला प्रशासन,खनन विभाग व पुलिस की उदासीनता के कारण अमरापाड़ा, महेशपुर थाना क्षेत्र की बांसलोई नदी में बालू का उत्खनन जोरों पर है। इसके कारण नदी का अस्तित्व खतरे में है। अवैध उत्खनन से नदी में बने पुल भी कमजोर पड़ने लगे हैं। जबकि अवैध बालू उठाव से नदी का अस्तित्व ही खतरे में नजर आ रहा है। यदि अवैध बालू उठाव पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो नदी बिन बालू के रह जाएगा।बालू माफिया के द्वारा नदी में जहां तहां खड्डा खोद कर बालू निकाला जा रहा है और जिम्मेदार चुपचाप तमाशा देख रहे है, बांसलोई नदी से दिन रात ट्रैक्टर के माध्यम से बालू की ढुलाई अवैध रूप से बदसूरत जारी है,दिन रात ट्रैक्टरों के परिवहन और इनके आवाज से लोगों की नींद हराम होती जा रही हैं,लेकिन जिम्मेदार अपनी नींद की परवाह किए बिना इन ट्रैक्टरों के आगे पीछे घूमते नजर आते है इस कार्य में कई गुट एक जुट संलिप्त हैं। सूत्रों की माने तो बांसलोई नदी से बालू लोड कर आने वाले प्रत्येक ट्रैक्टर से 200 रुपये की अवैध वसूली की जाती है, बताया जाता है कि नदी से प्रत्येक दिन करीब 200 सौ से जायदा ट्रैक्टर बालू का उठाव हो रहा है। यह बालू लदे ट्रैक्टर मुख्य सड़कों से ना जाकर गांव व मोहल्लों के कच्चे रास्तों से होकर गुजरते हैं। इससे प्रतिदिन सरकार को लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है। वहीं इस मामले में प्रशासनिक विभाग एवं खनन विभाग चुप्पी साधे हुए है। कई ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल कर पूरे जिले में बालू की सप्लाई की जा रही है अवैध रूप से। खबर तो यह भी है की बालू की अवैध ढुलाई कर विभिन्न जगह पर डंप किया जाता है और रात के अंधेरे में बड़ी गाड़ियों में बालू लोड कर बिहार,बंगाल भेजा जाता है।स्थानीय सफेदपोश के साथ जिम्मेदार खूब लुफ्त उठा रहे है बालू के खेल से।

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