रामगढ़/बोकारो। बाल विद्या मंदिर, आरा कोलियरी, रामगढ़ के प्राचार्य रंजीत कुमार सिंह ने जुड़ी न्यूज़ से बात करते हुए आज शुक्रवार को प्राचार्य दिवस के अवसर पर अपने विचार रखते हुए इस दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचार्य का पद विद्यालय का अति महत्वपूर्ण पद होता है।

इस पद पर आसीन व्यक्ति विद्यालय के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक प्राचार्य सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाओं में तालमेल बनता है तो वही विद्यालय में अध्यनरत विद्यार्थियों के लिए एक अभिभावक के रूप में अपना योगदान देता है। प्राचार्य की भूमिका शैक्षणिक वातावरण में निखार लाने के लिए महत्वपूर्ण है। शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रचार विद्यालय में महत्वपूर्ण कैलेंडर का निर्माण करता है और ध्यान रखता है कि इस दौरान बच्चों में केवल किताबी ज्ञान का भंडार ना हो बल्कि साथ ही साथ खेलकूद, प्रायोगिक ज्ञान, संगीत, परीक्षा की सफलता इत्यादि पर अपनी दृष्टि बनाएं रखे।
वहीं सेंट मैथ्यू स्कूल, ललपनिया के निदेशक अक्षय कुमार सिंह ने बदलते परिवेश में प्राचार्य एवं अभिभावकों में तालमेल होने के अति महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचार्य और अभिभावक का लगातार संपर्क विद्यालय में एक अच्छी वातावरण के लिए महत्वपूर्ण होता है।

इस संपर्क के माध्यम से ही बच्चे कि भविष्य पर चर्चा होती है। प्राचार्य का यह कर्तव्य की भी जरूरतमंद विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दें और इसके लिए विद्यालय में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को विशेष दिशा-निर्देश लगातार देते रहे। प्राचार्य का यह कर्तव्य है कि किसी भी शिक्षक की की नियुक्ति के पूर्व उसकी जांच जरूर करे एवं पूर्व इतिहास पर भी विशेष नजर डालें।विद्यालय परिसर में भाषा सदैव अनुकूल एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। गैर- शैक्षणिक कार्य से जुड़े हुए कर्मचारियों पर भी प्राचार्य का विशेष नजर होनी चाहिए क्योंकि उनके माध्यम से कई महत्वपूर्ण कार्य रोजाना विद्यालय में संपन्न होते हैं। उनकी ज़रूरतें और उनके महत्व को सभी विद्यार्थियों को बताना चाहिए ताकि विद्यार्थी भी उनका सम्मान करें। श्री सिंह ने इस अवसर पर भारत के सभी प्राचार्यगण को अपनी शुभकामनाएं भेंट की और उनसे बेहतर शिक्षा के विकास की अपील की।
किड्स आईलैंड पब्लिक स्कूल, तुपकाडीह के निदेशक डॉ सर्वेश कुमार दुबे ने स्कूल प्राचार्य दिवस को एक बेहतर मंच बताते हुए कहा कि यह दिवस प्रत्येक विद्यालय में नियुक्त प्राचार्य को एक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। इसके माध्यम से वे खुद में प्रेरणा हासिल करते हैं और विद्यार्थियों के बीच बेहतर शिक्षा की पहल करते हैं। प्राचार्य का पद एक विशेष पद है जो संपूर्ण विद्यालय की रूपरेखा निश्चित करती है। प्राचार्य एक सेतु का काम करता है शिक्षक एवं विद्यार्थियों के बीच।






