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May 10, 2026 8:53 pm

लाखों असहायों की दुआएं लुतफुल हक़ को दिला रही है मान सम्मान।

यासिर अराफात

पाकुड़ : पाकुड़ की धरती पर कई शख्शियत हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में अपना हुनर को निखारने में कामयाब रहे हैं। मगर इन सबके बीच जाने- माने समाजसेवी लुतफल हक ने सहयोग और गरीबों के बीच सेव करके अपनी इज्जत और रुतबा में चार चांद लगे हैं । वे सिर्फ और सिर्फ उद्योगपति ही नहीं बल्कि नेक किरदार के हमसफ़र भी हैं। उनके नेक किरदार ही आज उन्हें सीढ़ी दर सीढ़ी यानी कामयाबी की शिखर तक ले जाने में सहायक का मूल कारक बनकर उभर कर सामने आया है। और इन सब के बीच आम असहाय लोगों की दुआएं सबसे ज्यादा कारक है। वर्तमान में खास मौके पर आम इंसान की फिक्र व सहयोग की तमन्ना कहीं न कहीं निजी तमन्ना नजरे- अंदाज होती है। जिसकी एहसास आखिर हो ही जाती है। मगर लुतफुल हक के लिए यह वाक्य कुछ नहीं अपितु उनकी नेक किरदार गरीब असहायों के मायुस दिलों को खुशी से रोशन किया है.रेलवे स्टेशन परिसर में जब शाम के वक्त भुखे पेट में रहे असहायों की पत्ते/थाला/वर्तन पर भोजन परोसा जा रहा है तब नजारा देख दिल के टपकते आंसूओं को नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता है और इस दौरान रोजाना सैकड़ों असहायों की दुआएं लुतफुल हक के तरक्की की राह पर फरिश्ता बन रही है.आज यदि उन्हें मान- सम्मान, दौलत व शोहरतें हासिल हुई और देश- विदेशों में उन्हें अवार्ड से नवाजे जा रहा है तो निश्चित रूप से इन असहायों की दुआएं कहीं न कहीं आम-ओ-खास के साथ परमात्मा को भी खुश कर दिये होंगे। साथ ही अखबारों के पन्ने भी किरदार को परिभाषित करने में कलम की स्याही को भी मजबूर कर दिये होंगे। बहरहाल जो भी हो जाने माने उद्योगपति व समाजसेवी लुतफल हक के द्वारा हर क्षेत्र में सहयोग करने की चर्चा सिर्फ अख़बारों में ही सीमित नहीं है. जमीन पर उनकी सेवाएं देखी जा रही है. नतीजतन आज क्षेत्र के लोगों के लिए फ़रिश्ते से कम नहीं है.

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