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April 22, 2026 11:10 am

नरसिंहपुर पथरा में बेचैनी, राजनीति में शांति की बात : बिल्ली के गले में घंटी की बाते चूहा को बचाने के लिए



जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल

पलामू: कभी चौपालों पर कहा जाता था— “अगर के.एन. त्रिपाठी आएंगे तो अशांति फैलेगी, और अगर भाजपा के विधायक आएंगे तो शांति का राज होगा।”
लेकिन वक्त ने जैसे इस कथन को ही आईना दिखा दिया।
आज हालात ऐसे हैं कि नरसिंहपुर पथरा में ही लोग चैन से जीवन नहीं जी पा रहे हैं।गांव के लोग बताते हैं कि सड़क का इंतज़ार वर्षों से है,

*जमीन के कागज़ों पर सवाल उठ रहे हैं और चैनपुर अंचल कार्यालय की फाइलों में क्या-क्या खेल हुआ, इसकी सही जानकारी आज तक सामने नहीं आ पाई। किसके इशारे पर किया गया* जिन लोगों ने अपनी जमीन बचाकर रखी थी, आज वही लोग अपने हक को लेकर असमंजस में हैं।

कहने को तो सत्ता में तीसरी बार जीत का जश्न मनाया गया, लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर अपने ही गांव में शांति कायम नहीं हो पा रही, तो पूरे क्षेत्र में शांति का दावा किस आधार पर किया जा रहा है?
गांव के एक बुजुर्ग की कही बात अब लोगों के बीच चर्चा बन चुकी है। उन्होंने एक शादी समारोह में धीमे स्वर में कहा-

बेटा, नरसिंहपुर पथरा में जाना हो तो सोच समझकर जाना… हालात पहले जैसे नहीं रहे।”

यह सुनकर लोगों को वही पुरानी कहावत याद आ जाती है—
“बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे?”

आज स्थिति कुछ ऐसी ही दिखती है। जिनके कंधों पर शहर की सुरक्षा और व्यवस्था का भरोसा रखा गया, उनके अपने गांव में ही अशांति, जमीन विवाद और भू-माफियाओं की चर्चा गूंज रही है।

अब सवाल जनता से है

क्या शहर की कमान ऐसे हाथों में देना सही है, जिनके अपने आंगन में ही सुकून नहीं बचा?

और सबसे बड़ा सवाल यही है कि*जो शांति के वादे किए गए थे, वह आखिर रास्ते में ही कहाँ खो गई?

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